रमज़ान के दौरान आती है 'शब-ए-कद्र' की रात, जानिए क्या है इसकी अहमियत

शब-ए-कद्र 2024, लाइफस्टाइल डेस्क
शब-ए-कद्र 2024 (सोशल मीडिया)
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सीमा कुमारी

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: रमजान का पाक महीना खत्म होने जा रहा है। देश और दुनियाभर के मुसलमान भाई- बहन इबादत में जुटे हुए हैं। मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, रमजान के आखिरी दिनों में 'शब-ए-कद्र' की कई राते आती हैं, जिसका इस्लाम धर्म में काफी महत्व है। कहा जाता है कि इस रात जो भी दुआएं मांगी जाती हैं, वो कबूल होती ही हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि 'शब-ए-कद्र' (Shab-E-Qadr) का असल मतलब क्या है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस्लाम धर्म में इस मुबारक 'रमजान' (Ramadan) महीने को बहुत ही पाक और खास माना जाता है, क्योंकि Ramadan महीने में हर मुस्लिम रोज़े रखता है, पांच वक्त की नमाज़ के साथ-साथ तरावीह भी पढ़ता है और अल्लाह की खूब इबादत करता है। रोज़ा रखने के साथ-साथ शब-ए-कद्र की रातों का भी काफी अहमियत है। ऐसे में आइए जानें आखिर शब-ए-कद्र क्या है।

क्या होती है शब-ए-कद्र की रात

मुस्लिम धर्म गुरु के मुताबिक, रमजान के पवित्र महीने में मुसलमानों के लिए सबसे खास रातों में से एक शब-ए-कद्र की रात होती है। यह अल्लाह की रहमत और बरकत की रात है। मुस्लिम मान्यताओं के मुताबिक, इस रात में अल्लाह की इबादत करने के साथ अपने गुनाहों की तौबा करते हैं और माना जाता है कि उनकी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।

लैलातुल कद्र की रात

आपको बता दें, रमजान के पाक महीने की आखिरी दस रातों की विषम संख्या (Odd Number) वाली रातों में से कोई एक रात लैलातुल कद्र की रात होती है। रमजान माह की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं, और 29वीं रात में से 27वीं रात को लैलातुल कद्र की रात माना जाता है। 27वीं रात पर ज्यादा जोर दिया जाता है। साल 2024 में भारत में 6 अप्रैल को लैलातुल कद्र की रात होगी।शब-ए-कद्र की रात में रोजेदारों को अल्लाह की इबादत, जिक्रो-अजकार, दुआ, कुरान की तिलावत करते हैं। इस रात ज्यादातर लोग अपने और साथ ही अपने बुज़ुर्गों वालिदैन के गुनाहों की भी अल्लाह से माफी मांगते हैं।

अल्लाह से मांगते है दुआएं

शब-ए-कद्र (Shab-E-Qadr) की रात मुसलमानों के लिए एक बहुत ही खास रात होती है, क्योंकि इसमें इस्लाम मानने वाले लोग अल्लाह के करीब जाने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग इस रात जकात यानी दान भी करते हैं। वे गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और जरूरत की वस्तुएं दान करते हैं। वहीं, कुछ लोग अपने घरों और मस्जिदों को सजाते हैं। वे रंगीन रोशनी, फूल और सजावटी सामान का इस्तेमाल करते हैं।

शब-ए-कद्र की रात क्यों होती है ख़ास

रमजान के महीने में हर रात तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। रात की आखिरी नमाज तहज्जुद की नमाज भी पढ़ी जाती है।

कुरान शरीफ की तिलावत और हदीस की आयतें, पारा और नफ्ल नमाज पढ़ी जाती है।

इस रात में अल्लाह से दुआ करना और माफी मांगना बेहद खास माना जाता है।

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