
मृत व्यक्ति के कपड़े पहनना(सौ.सोशल मीडिया)
Dead Person Clothes: जन्म और मृत्यु इस संसार का अटल सत्य है। संसार में हर कोई जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु तय है और यही क्रम अनवरत चला आ रहा है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु मृत्यु और मृत्यु के बाद के बारे में गरुड़देव को विस्तारपूर्वक बताते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिनमें उसकी सांसारिक ऊर्जा, संस्कार और प्रेत-छाया का प्रभाव रह जाता है।
यदि जीवित लोग इन वस्तुओं का उपयोग कर लें, तो उन्हें न केवल पाप का भागी बनना पड़ता है, बल्कि जीवन में रोग, दरिद्रता, मानसिक अशांति और पितृदोष का भी सामना करना पड़ सकता है, यहां गरुड़ पुराण के अनुसार, मरे हुए व्यक्ति की कुछ ऐसी चीजें बताई जा रही हैं, जिन्हें जीवित लोगों को कभी उपयोग नहीं करना चाहिए-
नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
माना जाता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के कपड़ों में उसकी ऊर्जा, स्मृतियां और कभी-कभी नकारात्मक प्रभाव रहते हैं। ऐसे कपड़े पहनने से मानसिक अशांति या दुर्भाग्य का असर हो सकता है।
सनातन परंपरा में शुद्धता का बहुत महत्व है। मृत व्यक्ति से जुड़ी वस्तुएं संस्कार और अंतिम संस्कार के बाद भी अशुद्ध मानी जाती हैं, इसलिए उनका पहनना वर्जित होता है।
मृत शरीर या उसके आसपास के कपड़ों में संक्रमण का जोखिम या जीवाणु रह सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य के लिहाज से भी ऐसा करना उचित नहीं माना जाता।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मृत व्यक्ति के कपड़े दान कर देना या किसी जरूरतमंद को देना सबसे सही उपाय है। इससे न केवल व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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गरुड़ पुराण के अनुसार मृत व्यक्ति के कपड़ों का इस्तेमाल करने से जीवात्मा व्यक्ति से आकर्षित हो सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि व्यक्ति इन कपड़ों पहने को मृत व्यक्ति की ऊर्जा उसमें समाहित होने लगे। ऐसे में कपड़ा हो या हाथ की घड़ी या कोई ऐसी ही व्यक्ति से जुड़ी हुई चीज, इसके दोबारा इस्तेमाल न करें और इन्हें दान कर दें।






