फरवरी में किस दिन पड़ रही है द्विजप्रिय संकष्टी? जानिए सही तिथि, चंद्रोदय का समय और इसका महत्व

Lord Ganesha: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा का विधान है। संकष्टी व्रत चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
Dwijapriya Sankashti Chaturthi Kab Hai
श्री गणेश जी (सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Dwijapriya Sankashti Chaturthi Kab Hai:आगामी 02 फरवरी से फाल्गुन महीने की शुरुआत हो रही है। इस महीने में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी 2026 को है। सनातन धर्म में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का खास महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार,हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना लिए हुए प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर सुकर्मा योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि 2026

4 फरवरी 2026, रात 12:09 बजे

समाप्त: 5 फरवरी 2026, रात 12:22 बजे

व्रत का दिन (द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी)

व्रत 5 फरवरी 2026 को रखा जाएगा, क्योंकि उदया तिथि के अनुसार यह तिथि उसी दिन प्रमुख रहेगी।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:22 – 6:15 बजे

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 – 12:57 बजे

  • सुकर्मा योग और नक्षत्र का संयोग

5 फरवरी को सुकर्मा योग सूर्योदय से लेकर देर रात 12 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को नई शुरुआत और करियर संबंधी कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इसके बाद हस्त नक्षत्र शुरू हो जाएगा। इन शुभ योगों में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।

  • द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है। 5 फरवरी 2026 को चंद्रोदय का सही समय रात 09 बजकर 35 मिनट है। ऐसे में इस समय आप चांदी के बर्तन में जल, दूध और अक्षत लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं और अपना व्रत खोल सकते हैं।

  • द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के शुभ दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा करने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही गणेश जी के अशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान, बुद्धि, शुभता आदि की प्राप्ति होती है।वहीं इस दिन चंद्रमा की पूजा करने का भी विधान है। वहीं इस दिन पूजा गणेश की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com