सुबह गणेशजी की पूजा में करें इन संस्कृत श्लोकों का उच्चारण, रहेगा आपके लिए फलदायी

हिंदू धर्म में सबसे पहले भगवान गणेशजी की पूजा का विधान होता है, सर्व काम हो या नए काम को शुरू करने से पहले गणेशजी का ध्यान करने के नियम होते है। पूजा को सफल बनाने के लिए मंत्रों का उच्चारण करने के साथ आप भगवान गणेश के प्रभावशाली संस्कृत श्लोक का भी उच्चारण कर सकते है।
गणेशजी , संस्कृत श्लोक
प्रथम पूज्य भगवान गणेश (सौ.फाइल फोटो)
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7 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन से घरों और पंडालों में गणपति बप्पा विराजमान हो गए है। हिंदू धर्म में सबसे पहले भगवान गणेशजी की पूजा का विधान होता है, सर्व काम हो या नए काम को शुरू करने से पहले गणेशजी का ध्यान करने के नियम होते है। कहते है सुबह के समय आप गणेश जी की पूजा करने के साथ प्रभावशाली मंत्रों और आरती का उच्चारण करते है तो भगवान की कृपा आप पर बनी रहती है। गणेशोत्सव में बप्पा की आराधना नियमों के साथ करना चाहिए।

पूजा को सफल बनाने के लिए मंत्रों का उच्चारण करने के साथ आप भगवान गणेश के प्रभावशाली संस्कृत श्लोक का भी उच्चारण कर सकते है। इन्हें लेकर कहा गया है कि, यह श्लोक हमारे जीवन में अनुशासन और नैतिकता बनाकर रखते है। चलिए जानते है इसके बारे में

ये है भगवान गणेश के संस्कृत श्लोक

आज हम आपको गणेश भगवान के संस्कृत श्लोकों के बारे में बता रहे है जिनका उच्चारण आपको नियमित करना चाहिए, जो इस प्रकार है.. 1. वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा।। 2. मायातीताय भक्तानां कामपूराय ते नमः। सोमसूर्याग्निनेत्राय नमो विश्वम्भराय ते॥ 3. एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात्। 4. लम्बोदराय वै तुभ्यं सर्वोदरगताय च। अमायिने च मायाया आधाराय नमो नमः॥ 5. अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते । मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः।। 6. पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुद्रा। मायाविनां दुर्विभावयं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ 7. एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्।। 8. केयूरिणं हारकिरीटजुष्टं चतुर्भुजं पाशवराभयानिं। सृणिं वहन्तं गणपं त्रिनेत्रं सचामरस्त्रीयुगलेन युक्तम्।। 9. गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे। अपारकरुणापूरतरङ्गितदृशे नमः।। 10. रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षकं। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्।। 11. पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम्। भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥ 12. सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया। सर्वविध्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ 13. अनामयाय सर्वाय सर्वपूज्याय ते नमः। सगुणाय नमस्तुभ्यं ब्रह्मणे निर्गुणाय च॥ 14. त्रिलोकेश गुणातीत गुणक्षोम नमो नमः। त्रैलोक्यपालन विभो विश्वव्यापिन् नमो नमः॥

जानिए इसके फायदे

अगर आप पूजा के समय इन संस्कृत के उल्लेख का उच्चारण कर लेते है तो, गणेशजी के प्रति आपकी श्रद्धा और भक्ति और ज्यादा बढ़ जाती है। आपकी पूजा से भगवान गणेश प्रसन्न होते है। कहा जाता है कि, गणेश जी का श्लोकों का उच्चारण करने से जीवन में आने वाली सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। गणेश जी के श्लोक पढ़न मात्र से बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है। छोटे बच्चों को इन संस्कृत श्लोकों का पाठ कराना चाहिए ये उनके बौद्धिक स्तर को बढ़ाता है।

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