Afghanistan New Law: महिलाओं से ज्यादा जानवरों की सुरक्षा, पत्नी को पीटने पर 15 दिन, पशु क्रूरता पर 5 माह जेल

Afghan New Law: अफगानिस्तान में नया पीनल कोड लागू हुआ, जिसमें पत्नी को पीटने पर सिर्फ 15 दिन की सजा है, जबकि जानवरों की लड़ाई करवाने पर 5 महीने की कैद का प्रावधान है, जिससे पूरी दुनिया हैरान है।
Afghanistan's New Penal Code: 15 Days Jail for Domestic Violence vs 5 Months for Animal Cruelty
अफगानिस्तान में नया पीनल कोड लागू (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Gender Equality Violation In Afghanistan: अफगानिस्तान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने एक ऐसा नया पीनल कोड लागू किया है जिसने पूरी दुनिया के मानवाधिकार रक्षकों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस क्रूर कानून में महिलाओं के अधिकारों को कुचलते हुए उन्हें समाज में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है और जेंडर इक्वालिटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अफगानिस्तान में लैंगिक समानता उल्लंघन का यह उदाहरण दिखाता है कि वहां की महिलाओं के लिए अब अपने ही घर में सुरक्षित रहना और न्याय पाना कितना मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस डिक्री की कड़ी आलोचना की है क्योंकि यह कानून जानवरों के प्रति क्रूरता को इंसानी हिंसा की तुलना में कहीं अधिक गंभीर अपराध मानता है।

जानवरों और महिलाओं के लिए अलग मानदंड

नए दंड विधान के अनुसार अगर कोई पति अपनी पत्नी को इतनी बुरी तरह पीटता है कि शरीर पर घाव या खरोंच दिखें, तो उसे महज 15 दिन की जेल होगी। इसके विपरीत अगर कोई व्यक्ति मनोरंजन के लिए मुर्गों या तीतरों की लड़ाई करवाता है, तो उसे 5 महीने की कड़ी जेल की सजा भुगतनी पड़ती है जो बहुत अधिक है। यह विरोधाभास साफ बताता है कि तालिबान प्रशासन की नजर में महिलाओं की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण अब पक्षियों का मनोरंजन और उनका संरक्षण करना ही प्राथमिकता रह गया है।

महिलाओं की आजादी पर कड़ा पहरा

अब अगर कोई महिला अपने पति की मर्जी के बिना अपने पिता के घर जाकर रुकती है, तो उसे 3 महीने के लिए अंधेरी जेल में डाल दिया जाएगा। सजा केवल महिला को ही नहीं बल्कि उन रिश्तेदारों को भी मिलेगी जो उसे वापस उसके पति के घर भेजने में प्रशासन की सहायता नहीं करते या उसे रोकते हैं। घर के मुखिया को अब अपने परिवार के सदस्यों को सजा देने का कानूनी अधिकार मिल गया है जो महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा को खुली छूट देता है।

सामाजिक वर्ग के आधार पर न्याय

अफगानिस्तान में अब न्याय भी इंसान की सामाजिक हैसियत देखकर किया जाएगा जहां विद्वान लोगों को सिर्फ चेतावनी देकर कोर्ट से सम्मान के साथ छोड़ दिया जाएगा। व्यापारियों और आदिवासी नेताओं को केवल समन भेजा जाएगा, जबकि समाज के निचले तबके के लोगों को शारीरिक रूप से कोड़ों से पीटना अब उनके लिए अनिवार्य कर दिया है। यह नई व्यवस्था बताती है कि वहां अब आम आदमी और गरीब के लिए कानून का चेहरा बेहद डरावना, भेदभावपूर्ण और पूरी तरह से आम जनता के लिए क्रूर है।

गंभीर अपराध और वैश्विक आक्रोश

किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो, हत्या के मामले में सभी को समान रूप से मौत की सजा दी जाएगी और पैगंबर के अपमान के लिए भी मौत का प्रावधान है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने इस डिक्री को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों का घोर, अमानवीय और लैंगिक असमानता वाला उल्लंघन करार दिया है। दुनिया भर के विशेषज्ञ और सुसान फर्ग्यूसन चेतावनी दे रहे हैं कि अपनी आधी आबादी को घर में कैद रखकर कोई भी देश कभी भी तरक्की के रास्ते पर नहीं बढ़ सकता।

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