Ramayan Katha: वनवास के दौरान माता सीता ने पिया था इस कुंड का जल, आज भी नहीं सूखता सीता कुंड

Ramayan Katha: श्रीराम से जुड़ी अनेक लोककथाएं और धार्मिक प्रसंग हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित हैं। इनमें श्रीराम का जन्म, माता सीता से विवाह और 14 वर्षों के वनवास से जुड़ी घटनाएं प्रमुख रूप से शामिल है
Ramayan Story: During her exile, Mother Sita drank water from this pond, and even today, Sita Kund never dries up.
Sita Kund (Source. Pinterest)
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Sita Kund Purulia: प्रभु श्रीराम से जुड़ी अनेक लोककथाएं और धार्मिक प्रसंग हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित हैं। इनमें श्रीराम का जन्म, माता सीता से विवाह और 14 वर्षों के वनवास से जुड़ी घटनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कुछ समय बिताया था। ऐसे ही एक पावन स्थल की पहचान झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित पुरुलिया जिले में की जाती है। यहां अयोध्या पहाड़ी पर स्थित एक धार्मिक स्थल है, जिसे सीता कुंड के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड का जल स्वयं माता सीता ने पिया था।

वनवास के दौरान यहां रुके थे राम, सीता और लक्ष्मण

कथा के अनुसार, जब राजा दशरथ ने अपने पुत्र प्रभु श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास दिया, तब माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए निकले। वनवास के इसी दौरान तीनों ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित कार्तिवास आश्रम में लगभग ढाई दिन तक विश्राम किया था। यह स्थान आज भी रामायण काल की स्मृतियों को संजोए हुए है।

धनुष-बाण से प्रकट हुई जलधारा

लोककथा के मुताबिक, वनवास के समय अयोध्या पहाड़ी पर चलते-चलते माता सीता को तेज प्यास लग गई। आसपास कहीं जल का स्रोत न मिलने पर प्रभु श्रीराम ने जल की व्यवस्था करने का संकल्प लिया। कहा जाता है कि रामचंद्र जी ने अयोध्या पहाड़ी की तलहटी में अपने धनुष-बाण से तीर चलाया, जिससे धरती के भीतर से शुद्ध जल की अविरल धारा फूट पड़ी। माता सीता ने उसी जल को पीकर अपनी प्यास बुझाई। यही स्थान आज सीता कुंड के रूप में श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

कभी नहीं सूखता सीता कुंड

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सीता कुंड का पानी कभी कम नहीं होता और यह कुंड कभी सूखता नहीं है। आज भी यहां से मीठे पानी की निरंतर धारा निकलती रहती है। हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जनजातीय समुदाय के शिकारी सैकड़ों की संख्या में यहां पहुंचते हैं और कुंड के पवित्र जल को ग्रहण करते हैं।

अयोध्या पहाड़ी और राम मंदिर की मान्यता

माना जाता है कि प्रभु श्रीराम और माता सीता के यहां आगमन के बाद से ही इस पहाड़ी को अयोध्या पहाड़ी कहा जाने लगा। इसे शांति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। वर्तमान समय में यहां एक प्रसिद्ध राम मंदिर भी स्थित है, जहां 365 दिन दीप प्रज्वलित रहता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर और सीता कुंड के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।

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