बजट से पहले फडणवीस सरकार का बड़ा दांव, विधानसभा में 11,995 करोड़ की अनुपूरक मांगें पेश, बिजली-उद्योगों पर जोर

Maharashtra Budget Session: महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में 11,995.33 करोड़ की अनुपूरक मांगें पेश की हैं। इसमें ऊर्जा और उद्योग क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जो राज्य के विकास को नई गति देगा।
Maharashtra government presented supplementary demands worth Rs 11,995 crore
Published on
Updated on

Maharashtra Supplementary Demands For Grants: महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी को शुरू हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री और वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इससे पहले बजट सत्र के दूसरे दिन यानी 24 फरवरी को राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को सदन में 11,995.33 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगें पेश कीं।

यह कदम आगामी 6 मार्च को पेश होने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट से ठीक पहले उठाया गया है। अनुपूरक मांगें दरअसल वह अतिरिक्त धनराशि होती है जिसकी आवश्यकता सरकार को तब पड़ती है जब बजट में आवंटित राशि कम पड़ जाती है या कुछ अप्रत्याशित खर्च सामने आते हैं।

किस विभाग को क्या मिला?

इस भारी-भरकम राशि में सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा, श्रम और उद्योग क्षेत्रों के खाते में गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो ऊर्जा और उद्योग क्षेत्रों के लिए कुल 4,066 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है। इसमें से 3,262 करोड़ रुपये विशेष रूप से बिजली क्षेत्र की मजबूती के लिए रखे गए हैं। ग्राम एवं लघु उद्योगों के विकास के लिए 803 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पानी और स्वच्छता के बुनियादी ढांचे के लिए 1,431 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। लोक निर्माण कार्यों के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने 71.03 करोड़ रुपये की मांग की है।

राजस्व और पूंजीगत खर्च का गणित

प्रस्तुत विवरण के अनुसार, महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने खर्च को दो मुख्य भागों में बांटा है। 5,748.10 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए रखे गए हैं, जबकि बुनियादी ढांचे के विकास यानी पूंजीगत मद के लिए 6,003.79 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कल्याण के लिए 23.64 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा के लिए 31.43 करोड़ रुपये और राजस्व एवं वन विभाग के लिए 132 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जानकारों का मानना है कि इन मांगों के जरिए सरकार चुनाव से पहले विकास कार्यों की गति तेज करना चाहती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com