
सकट चौथ के व्रत का पारण (सौ.सोशल मीडिया)
Sakat Chauth Parana Method: आज मंगलवार को सकट चौथ का पावन व्रत मनाया जा रहा है। विध्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित इस व्रत में भगवान गणेश, सकट माता और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन महिलाएं खासतौर पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
इसके साथ ही शाम को चंद्रोदय के बाद व्रत का पारण करती है। शास्त्रों में जितना महत्व व्रत रखने का है, उतना ही महत्व सही समय पर व्रत खोलने यानी पारण का भी है।
गलत समय या गलत विधि से किया गया पारण व्रत के पूर्ण फल से वंचित रख सकता है। आइए जानते हैं आज पारण का सही समय, शुभ मुहूर्त और वो जरूरी नियम जो आपको आज ध्यान रखने चाहिए…
बता दें कि शहर के अनुसार चंद्रोदय के समय में थोड़ा सा हेरफेर हो सकता है। बता दें कि चंद्रोदय रात 08:54 बजे होगा।
सकट चौथ के दिन यानी आज शाम को शुभ मुहूर्त में गणेश भगवान के साथ सकट माता की विधिवत पूजा करें। इसके साथ ही तिलकुट का भोग लगाने के साथ घी का दीपक जलाकर सकट चौथ की व्रत कथा का पाठ करें।
इसके साथ ही गणेश जी के मंत्रों का जप करने के साथ गणेश आरती, सकट माता की आरती करें। फिर चंद्रोदय का इंतजार करें। चंद्रोदय होने पर चंद्र देव की विधिवत पूजा करने के बाद अर्घ्य दें।
इसके बाद अपना व्रत खोलें। पारण के बाद सबसे पहले तिल और गुड़ से बनी चीजों का सेवन करें और इसके बाद फूल, दूध, शकरकंद आदि का सेवन करें। इसके बाद अगले दिन यानी 7 जनवरी को सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद अन्न ग्रहण करें।
शास्त्रों और पुराणों में सकट चौथ के व्रत को आत्मसंयम और आंतरिक संतुलन का साधन बताया गया है। यह व्रत व्यक्ति को अनुशासित जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है।
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कहा जाता है कि, व्रत के दौरान सात्विक आहार, संयमित दिनचर्या और नियमपूर्वक पारण करने से मानसिक अशांति, भय और नकारात्मकता दूर होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह साधना जीवन में आने वाले संकटों को सहन करने की शक्ति प्रदान करती है। विशेष रूप से गृहस्थों के लिए यह व्रत पारिवारिक संबंधों में मधुरता, संतान सुख और मानसिक स्थिरता लाने में सहायक माना गया है।






