कौन हैं रकीबुल हुसैन, कैसे कांग्रेस में मचा दिए कलह? असम चुनाव से पहले पार्टी में मचा बवाल

Assam Congress News : असम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में बवाल मचा है। विवादों के केंद्र में धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन हैं। भूपेन बोरा ने बीजेपी में जाने के पीछे रकीबुल हुसैन को जिम्मेदार ठहराया है।
Who is Rakibul Hussain, and how did he stir up trouble within the Congress party ahead of the Assam elections?
रकीबुल हुसैन और भूपेन बोरा।
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Rakibul Hussain News : राजनीति में कब दोस्ती दुश्मनी में बदल जाए और कब हाथ साथ छोड़ दे, यह कहना मुश्किल है। असम प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने आखिरकार कांग्रेस को टाटा-बाय-बाय कह दिया है। मामला ऐसा फंसा कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें मनाने के लिए मिठाई का डिब्बा लेकर खड़ा रह गया और भूपेन जी ने पड़ोस वाली बीजेपी की चाय स्वीकार कर ली। कहानी शुरू होती है 16 फरवरी को, जब भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा थमाया। कांग्रेस ने सोचा, अरे ये तो रूठना-मनाना है। सीनियर नेताओं की फौज-गौरव गोगोई से लेकर जितेंद्र सिंह तक-उनके घर की तरफ ऐसे दौड़े जैसे सेल में आखिरी शर्ट बची हो।

जितेंद्र सिंह ने तो बाहर आकर बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि हमने इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। भूपेन जी मान जाएंगे, लेकिन अगले दिन भूपेन बोरा ने साफ कर दिया कि मानना तो दूर मैंने तो कमल पकड़ने की तारीख भी तय कर ली है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मुस्कुराते हुए कंफर्म किया कि 22 फरवरी को भूपेन बोरा बीजेपी के हो जाएंगे। हिमंत बिस्वा सरमा ने तो भूपेन को कांग्रेस का आखिरी सर्वमान्य हिंदू नेता घोषित कर दिया। अब बीजेपी में उन्हें सम्मान और विधानसभा चुनाव का टिकट का वादा मिला है।

आखिर विलेन कौन?

अब सवाल ये है कि भूपेन बोरा ने सजे-सजाए बंगले को लात क्यों मारी? इसका जवाब है-रकीबुल हुसैन। भूपेन बोरा का आरोप है कि असम कांग्रेस अब असली कांग्रेस नहीं रही, बल्कि APCC-R (रकीबुल कांग्रेस) बन गई है। बोरा का कहना है कि रकीबुल हुसैन पार्टी को अपनी जागीर की तरह चला रहे हैं। 2024 में धुबरी सीट से 10 लाख से ज्यादा वोटों के रिकॉर्ड अंतर से क्या जीते, रकीबुल साहब का जलवा ऐसा बढ़ा कि पार्टी के अध्यक्ष भी बौने लगने लगे। भूपेन बोरा ने तंज कसते हुए कहा कि मैंने अपने करीबियों से कह दिया है कि कांग्रेस में रहना है तो APCC में नहीं, रकीबुल की APCC-R में रहना सीखो।

बेटे को टिकट और खुद की हार: समागुड़ी का सियापा

भूपेन बोरा के दिल में सबसे बड़ा कांटा समागुड़ी उपचुनाव को लेकर चुभा है। रकीबुल हुसैन वहां से 5 बार विधायक रहे थे, लेकिन जब वो सांसद बने और सीट खाली हुई तो भूपेन बोरा वहां से खुद चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन रकीबुल ने पुत्र मोह में अपने बेटे तंजिल को टिकट दिलवा दिया। नतीजा? मुस्लिम बहुल सीट होने के बावजूद कांग्रेस हार गई और बीजेपी के दिप्लु रंजन सरमा ने बाजी मार ली। बोरा का दर्द यही है-अगर मैं लड़ता तो जीतता, पर यहां तो परिवारवाद ने बेड़ा गर्क कर दिया।

महाजोट का महा-झमेला

भूपेन बोरा ने रकीबुल पर एक और पुरानी फाइल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में बदरुद्दीन अजमल (AIUDF) के साथ जो महाजोट (गठबंधन) हुआ था, वह रकीबुल की ही जिद थी। बाद में उसी अजमल ने बीजेपी की तारीफें शुरू कर दीं और कांग्रेस का सारा वोट बैंक रायता बनकर फैल गया।

2015 की यादें ताजा हुईं

भूपेन बोरा का जाना बिल्कुल वैसा ही है जैसा 2015 में हिमंत बिस्वा सरमा का जाना था। तब हिमंत जी तरुण गोगोई और राहुल गांधी से परेशान थे, आज भूपेन जी रकीबुल से परेशान हैं। बस किरदार बदल गए हैं, लेकिन कांग्रेस छोड़ो अभियान की स्क्रिप्ट वही पुरानी है। कुल मिलाकर असम कांग्रेस में अब गौरव (गोगोई) अकेले बच गए हैं, क्योंकि भूपेन ने तो भगवा चोला ओढ़ने की तैयारी कर ली है। अब देखना यह है कि 22 फरवरी के बाद रकीबुल की APCC-R कितनी मजबूत रहती है या बीजेपी क्लीन स्वीप की ओर बढ़ती है।

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