
हिमंत बिस्वा सरमा और भूपेश बघेल।
Himanta Biswa On Congress Leaders : असम की सियासत में इन दिनों आरोपों और कानूनी जंग का पारा सातवें आसमान पर है। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग अब अदालत की दहलीज तक पहुंचने वाली है। मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस नेता भूपेश बघेल, गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह और देबब्रत सैकिया के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने का फैसला लिया है।
विवाद की शुरुआत कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। उसमें गौरव गोगोई और अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री पर जमीन कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री के परिवार ने असम में करीब 12 हजार बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए Who Is HBS नाम से वेबसाइट और अभियान भी शुरू करने की कोशिश की। वैसे, कांग्रेस ने यह भी आरोप जड़ा कि भाजपा की आईटी सेल ने लॉन्चिंग के वक्तउनकी वेबसाइट हैक कर ली।
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कांग्रेस नेताओं को गांधी परिवार का गुलाम बताते हुए खुली चुनौती दी। सरमा ने स्पष्ट किया कि अब आरोप लगाकर भाग जाने वाली राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने ऐलान किया कि वे 9 फरवरी को इन नेताओं के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल मानहानि का केस दर्ज करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के पास रत्ती भर भी सबूत हैं तो वे उसे अदालत में साबित करें।
I am initiating civil and criminal defamation proceedings on 9 February 2026 against @JitendraSAlwar, @bhupeshbaghel, @GauravGogoiAsm and @DsaikiaOfficial for making false, malicious and defamatory statements against me in today’s press conference. The era of hit-and-run… — Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) February 4, 2026
यह भी पढ़ें : असम से बाहर होंगे ‘अवैध प्रवासी’! एक्शन में आए सीएम हिमंत, बोले- मियां समुदाय को झेलनी होगी परेशानी
असम में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे ठीक पहले आए इस राजनीतिक भूचाल ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। कांग्रेस इसे मुख्यमंत्री के खिलाफ एक चार्जशीट की तरह पेश कर रही है। वहीं, सरमा ने कानूनी कार्रवाई का दांव खेलकर विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति अपनाई है। इससे पहले सरमा ने गौरव गोगोई पर पाकिस्तानी एजेंसी से लिंक होने का आरोप लगाकर हलचल मचा दी थी। अब देखना होगा कि 9 फरवरी को शुरू होने वाली यह कानूनी लड़ाई असम की सत्ता की चाबी किसे सौंपती है।






