

Yavatmal ZP Employee Cooperative Society: यवतमाल जिला परिषद कर्मचारी सहकारी पतसंस्था ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6.70 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित करने का दावा करते हुए गृह ऋण पर ब्याज दर घटाकर 9 प्रतिशत करने की घोषणा की है। हालांकि, इस दावे के साथ ही संस्था के पुराने वित्तीय लेनदेन और कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस पतसंस्था के कामकाज के विरोध में पहले स्वयं कर्मचारी सदस्य धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं।
संस्था में वित्तीय लेनदेन में कथित मनमानी, पारदर्शिता की कमी तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सदस्यों ने उपनिबंधक के पास शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों पर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने से सदस्यों में नाराजगी बताई जा रही है। रविवार को पत्रकार परिषद में अध्यक्ष महेश सोनेकर एवं संचालक मंडल ने दावा किया कि संस्था ने 237 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए हैं, 340 करोड़ रुपये की जमा राशि, 180 करोड़ रुपये का निवेश तथा जमाओं पर 10 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है।
हालांकि, विरोधी गुट के अनुसार इन वित्तीय आंकड़ों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी आरोप है कि संस्था ने लेखापरीक्षण (ऑडिट) रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, जिससे इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं। संस्था द्वारा विभिन्न योजनाओं, बीमा लाभ, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक उपक्रमों का प्रचार किया जा रहा है, लेकिन पूर्व में दर्ज शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और सदस्यों की आपत्तियों का निराकरण हुआ या नहीं, इस संबंध में संचालक मंडल की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
विरोधियों का कहना है कि लाभ के दावों के बावजूद विवादित मुद्दों पर संस्था मौन है। वर्ष 2016 की वार्षिक सभा में वर्तमान सत्तारूढ़ संचालक मंडल के सदस्य विपक्ष में थे। उस समय उन्होंने संस्था के वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग करते हुए 161 लिखित प्रश्न उठाए थे। अब वर्तमान में विपक्ष संस्था की विभिन्न योजनाओं में निधि के उपयोग, करोड़ों रुपये के निवेश तथा वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, लेकिन उस समय उठाए गए मुद्दों पर वर्तमान संचालक मंडल की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।
वर्ष 2023 में भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की शिकायत के बाद यवतमाल जिला उपनिबंधक ने भर्ती पर रोक लगा दी थी। यह मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद संस्था की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। विरोधी पक्ष का आरोप है कि सदस्यों को समय पर वित्तीय जानकारी नहीं दी जाती, आमसभा में पूछे गए प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता तथा निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। संस्था के उपविधियों में किए गए बदलाव, आम नागरिकों को सदस्य बनाने के निर्णय तथा वर्तमान संचालक मंडल के कई फैसलों पर भी कानूनी आपत्तियां दर्ज हैं।