

Yavatmal MSRTC Employees Salary Hike: यवतमाल जिले में रापनि (एसटी) के यवतमाल, पुसद, दारव्हा, उमरखेड़, वणी, पांढरकवड़ा, दिग्रस, घाटंजी, रालेगांव, महागांव, नेर, आर्णी, बाभुलगांव, कलंब और झरी-जामणी आगारों के सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारियों को कई आंदोलन करने के बावजूद वेतन वृद्धि के अंतर की राशि अब तक नहीं मिली है। वर्तमान में राज्य में जारी निधि की कमी का सीधा असर यवतमाल विभाग के एसटी कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है।
वेतन वृद्धि की बकाया राशि, पीएफ (PF) और अन्य वैधानिक देनदारियां लंबित रहने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कोरोना काल के लॉकडाउन और उसके बाद एसटी कर्मचारियों द्वारा किए गए लंबे समय तक काम बंद आंदोलन के कारण एसटी महामंडल की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी। कर्मचारियों के आंदोलन के बाद सरकार ने मूल वेतन में वृद्धि और अन्य सुविधाएं देने को मंजूरी दी थी। लेकिन इसके बाद भी कई वर्ष बीत जाने के बावजूद एसटी कर्मचारियों को मूल वेतन वृद्धि की अंतर राशि नहीं मिली है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि जिले के एसटी कर्मचारियों का महामंडल पर बड़ी मात्रा में पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और अन्य आर्थिक देनदारियां बकाया हैं। वहीं कर्मचारियों में यह भी चिंता बनी हुई है कि पीएफ (PF) एडवांस सहित अन्य आर्थिक लाभ समय पर मिल पाएंगे या नहीं। इस बीच, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के पास स्थानीय एसटी प्रशासन और महामंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। लेकिन मांग की तुलना में शासन द्वारा कम निधि मंजूर किए जाने से एसटी कर्मचारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र राज्य के एसटी कर्मचारियों की तरह ही यवतमाल जिले के विभिन्न आगारों के कर्मचारियों को भी वेतन वृद्धि की बकाया राशि का इंतजार है। महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल ने वेतन वृद्धि के अंतर भुगतान करने के लिए शासन से 410 करोड़ रुपये की मांग की थी। लेकिन वित्त विभाग की ओर से केवल 45 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निधि मंजूर किया गया है। इससे एसटी कर्मचारियों में तीव्र नाराजगी व्यक्त की जा रही है। एसटी महामंडल को हर महीने कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए लगभग 533 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।