किसानों ने किया शक्तिपीठ हाईवे का विरोध (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Yavatmal News: राज्य सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शक्तिपीठ राजमार्ग बनाने पर जोर दे रहे हैं, वहीं इस राजमार्ग पर कृषि गणना का काम तेज़ हो गया है। इसी सिलसिले में राजस्व प्रशासन की टीम पास के बेलखेड परिसर में पगडंडी मार्ग पर आनेवाले आने वाले खेतों की गणना करने गई थी। इस टीम को किसानों के कड़े विरोध के कारण दोपहर एक बजे लौट गई।
उपविभागीय अधिकारी सखाराम मुले, भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों, कृषि सहायक, पटवारी, संबंधित मोनार्क कंपनी के अधिकारियों और दंगा नियंत्रण दल के साथ शक्तिपीठ राजमार्ग की नापजोख के लिए सुबह दस बजे बेलखेड परिसर पहुंचे थे। लगभग 100 किसान हमें अपनी ज़मीन देने को तैयार नहीं थे! किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से पूछा कि सरकार यह शक्तिपीठ राजमार्ग क्यों बना रही है। जबकि समानांतर सड़क नागपुर बोरी तुलजापुर राजमार्ग पर है। किसानों ने यह भी कहा कि पैसे के बदले हमारी अच्छी उपजाऊ जमीन लेने के बजाय, हमें गोली मार देनी चाहिए।
उप-विभागीय अधिकारी ने कहा कि यह शक्तिपीठ राजमार्ग हर हाल में बनेगा और आपको उचित मुआवज़ा मिलेगा। किसानों ने कहा, तुम हमें मार डालो ! ज़मीन ले लो! हमारी मौत के बाद ही ज़मीन हस्तांतरित करो। दो घंटे के विरोध प्रदर्शन के बाद, किसानों ने आखिरकार मांग की कि हमें अपने खेतों से यह शक्तिपीठ राजमार्ग नहीं चाहिए ! टीम को वापस लौटना पड़ा। बेलखेड परिसर की लगभग 50 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि इस शक्तिपीठ राजमार्ग में शामिल होगी।
उप-विभागीय अधिकारी ने इस समय बताया कि दूसरी तरफ दहागांव सुकली और महागांव तहसील के किसानों की जमीन की माप जा चुकी है और मुआवजे की राशि के संबंध में किसानों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें पैसे दिए जाएंगे। गुस्साए किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर खेत की दोबारा नाप-जोख हुई तो हम और हमारे परिवार आत्महत्या कर लेंगे। इस समय सिद्धेश्वर जगताप, सचिन शिंदे, नारायण शिंदे, शिवाजी शिंदे, स्वप्निल शिंदे, विजय अलत, अशोक फटिंग, कैलाश कदम, मारोतराव पाटिल समेत सैकड़ों किसान मौजूद थे।
उमरखेड़ के अनुविभागीय राजस्व सखाराम मुले ने कहा कि यह राज्य सरकार की एक निजी परियोजना है और इस संबंध में सरकार की नीति तय हो चुकी है। वर्धा, यवतमाल, आर्णी, रालेगांव और कलंब तहसील में गणना का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है और उनकी शीट भी तैयार हो चुकी है।
धारा 15 और धारा 18 के अनुसार, जिन लोगों को सूचित किया जाएगा, उन्हें आगामी अक्टूबर की दिवाली पर किसानों से पैसा मिलेगा। ऐसा नहीं है कि यह परियोजना रद्द कर दी जाएगी। सिर्फ़ विरोध करने पर हम किसानों को परेशान नहीं करेंगे। किसानों को सहयोगात्मक भूमिका निभानी चाहिए। इसके बाद, सरकार जो भी निर्णय लेगी, उसके अनुसार हम काम करेंगे।
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बेलखेड़ के किसान सिद्धेश्वर जगताप ने कहा कि यह सरकार शक्तिपीठ हाईवे के लिए तरह-तरह की मांग कर रही है। हमें अपनी उपजाऊ जमीन दोबारा नहीं मिलेगी। बेरोज़गारी बढ़ गई है। ऐसे में हम खेती की जमीन के भरोसे परिवार की गाड़ी चला रहे हैं। इसलिए सरकार को इस शक्तिपीठ हाईवे को रद्द कर देना चाहिए। हम मरकर भी जमीन नहीं देंगे। अगर वे हमें डराने की कोशिश करेंगे, तो हम डरे हुए लोगों से भीख नहीं मांगेंगे।