यवतमाल में सियासी विस्फोट! चिखलगांव ग्रामपंचायत के इन 8 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, देखें लिस्ट

Gram Panchayat Corruption Charges: वणी तहसील के चिखलगांव में नए साल का आगाज किसी सियासी धमाके से कम नहीं रहा। 18 सदस्यीय ग्रामपंचायत में से 8 सदस्यों का सामूहिक इस्तीफा ने सनसनी मचा दी।
Yavatmal leaders resignation
सदस्यों ने दिया इस्तीफा (सौजन्य-नवभारत)
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Yavatmal News: नए साल की शुरुआत होते ही चिखलगांव में राजनीति का फट पड़ा है। ग्रामीण विकास की बात करने वाली ग्रामपंचायत अब खामोशी नहीं, बल्कि बवाल का केंद्र बन चुकी है, ग्रामपंचायत के कुल 18 में से 8 सदस्यों ने एकसाथ अपना इस्तीफा देकर पूरा माहौल गरमा दिया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की गुमटियों तक एक ही चर्चा आखिर चिखलगांव में चल क्या रहा है?

इस्तीफा देने वाले सदस्यों में संतोष राजुरकर, अतुल चांदेकर, पंकज मोरे, हरिश्चंद्र कारेकर, सुधीर ठेंगणे, अर्चना वानखेडे, सुचिता भगत और माया माते का समावेश है। इन सभी का आरोप है कि ग्रामपंचायत में हुकूमशाही तरीके से कामकाज चल रहा है, और उन्हें फैसले लेने की प्रक्रिया से जानबूझकर दूर रखा जा रहा है।

कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव

सदस्यों का यह भी आरोप है कि पंचायत बैठकों की कार्यवाही लिखित तौर पर दर्ज नहीं की जाती, उन्हें कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया जाता है। गांव में जारी निर्माण कार्यों पर दी गई उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया जाता है। कई काम नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे हैं। भुगतान प्रक्रिया में सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया जाता है।

पारदर्शिता पूरी तरह खत्म आरोपों की श्रृंखला यहीं नहीं थमी सदस्यों ने यह भी कहा कि जब विभिन्न ले-आउट विकास कार्यों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो सरपंच व उपसरपंच जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि सरपंच और उपसरपंच अपने निजी ले-आउट में विकास कार्य करवाते हुए परस्पर ठराव पास करवाते हैं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

इस्तीफा देने वाले सदस्यों का साफ कहना है कि इस स्थिति में लोकतांत्रिक ढंग से काम करना असंभव हो गया है। ग्रामस्थों की समस्याएँ जस की तस पड़ी हैं और विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं। ऐसे माहौल में जनता के हितों की रक्षा नहीं हो पा रही है। इसलिए ही सामूहिक इस्तीफे का कठोर निर्णय लेना पड़ा है।

उपसरपंच समेत कुल 18 सदस्य

चिखलगांव ग्रामपंचायत में सरपंच, उपसरपंच समेत कुल 18 सदस्य है। ऐसे में 8 सदस्यों का एक साथ पद छोड़ना न केवल गांव में बल्कि पूरे परिसर में चर्चा और सियासी सरगर्मी का विषय बन चुका है। स्थानीय नागरिक भी इस अध्धत्याशित घटनाक्रम के बाद यह सोचने पर मजबूर हैं कि कहीं आने वाले दिनों में ग्राम पंचायत पर प्रशासनिक सकट तो नहीं खड़ा होगा?

नए साल के पहले दिन ही इस तरह का राजनीतिक विस्फोट चिखलगांव में आने वाले समय की नई सत्ता-समीकरण और खीचतान का संकेत माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि चर्चा और प्रयास से समाधान निकलता है या फिर यह मामला बड़े राजनीतिक टकराव की दिशा पकड़ता है।।

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