Wardha News: वर्धा वन विभाग की नियुक्ति विवादों में, मानद वन्यजीव रक्षक चयन पर सवाल

Wardha Forest Department: महाराष्ट्र सरकार द्वारा वर्धा में मानद वन्यजीव रक्षकों की नियुक्ति के बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि एक नियुक्त उम्मीदवार साक्षात्कार में शामिल नहीं हुआ था।
wardha honorary wildlife warden appointment controversy
वन्यजीव रक्षक चयन विवाद - एआय जनरेटेड फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Wildlife Warden Appointment Controversy: महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा 13 जुलाई को जारी आदेश के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में 36 मानद वन्यजीव रक्षकों की नियुक्ति की गई है। वर्धा जिले में हुई एक नियुक्ति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एक नियुक्त उम्मीदवार साक्षात्कार प्रक्रिया में उपस्थित नहीं हुआ था, इसके बावजूद उसे मानद वन्यजीव रक्षक नियुक्त किया गया। शासन के आदेश के अनुसार वर्धा जिले में कौशल केदारनाथ मिश्र, कौस्तुभ विजय गावंडे और प्रणव सुरेश जोशी को मानद वन्यजीव रक्षक नियुक्त किया गया है।

जानकारों के अनुसार कौशल मिश्र लंबे समय से वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस विषय पर उनका अच्छा अध्ययन माना जाता है। वहीं कौस्तुभ गावंडे भी वन्यजीव संरक्षण तथा वन विभाग की विभिन्न रेस्क्यू गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाते रहे हैं। हालांकि प्रणव जोशी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ वन्यजीव प्रेमियों का दावा है कि उनका वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रत्यक्ष कार्य का अनुभव सीमित है तथा वे विभाग द्वारा आयोजित साक्षात्कार में भी उपस्थित नहीं हुए थे।

नियुक्ति में पारदर्शिता पर उठे सवाल

इसके बावजूद उनकी नियुक्ति होने से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों का आरोप है कि यह नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव के आधार पर हुई है। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूर्व में जिले में कौशल मिश्र और संजय इंगले तिगावकर मानद वन्यजीव रक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस बार संजय इंगले तिगावकर ने भी आवेदन कर साक्षात्कार दिया था, लेकिन उनका चयन नहीं हो सका। इसे लेकर भी वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा।

50 प्रश महिलाओं की भागीदारी का प्रावधान

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 4 (1) के तहत राज्य सरकार मानद वन्यजीव रक्षकों की नियुक्ति करती है। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। यह पद पूर्णतः मानद एवं अवैतनिक होता है। चयन के लिए वन्यजीव संरक्षण, संवर्धन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष के क्षेत्र में अनुभव को महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही, आवेदक का संबंधित जिले का निवासी होना आवश्यक है। संशोधित नीति के अनुसार इन पदों पर 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का भी प्रावधान है।

वन विभाग व नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी

मानद वन्यजीव रक्षक वन विभाग और आम नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं। सामान्यतः चयन प्रक्रिया के तहत आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, आवश्यक दस्तावेज और कार्य अनुभव का परीक्षण किया जाता है तथा राज्य वन्यजीव सलाहकार मंडल की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार अंतिम नियुक्ति करती है। इस पूरे मामले में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, इस संबंध में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए उपवन संरक्षक हरवीर सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका।

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