कीटनाशक बना मौत का जरिया! वर्धा में चार महीने में 299 लोगों ने पिया जहर, जानिए क्या है कारण?

Wardha News: वर्धा में अप्रैल-जुलाई 2025 के बीच 299 लोगों ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या की कोशिश की। मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और पारिवारिक कलह इसके मुख्य कारण हैं।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Wardha News In Hindi: महाराष्ट्र के वर्धा जिले में आत्महत्या के प्रयासों से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच, मात्र चार महीनों की अवधि में 299 लोगों ने कीटनाशक का सेवन कर अपनी जान लेने की कोशिश की। इस गंभीर स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन आत्महत्या के प्रयासों के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक कलह और उम्मीदों का टूटना शामिल है। इन मामलों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है।

यह डेटा वर्धा जिले में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर तुरंत ध्यान देने और एक गहरा अध्ययन करने की आवश्यकता है ताकि इन प्रयासों को रोका जा सके।

सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र

जिला अस्पतालों में दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्धा तहसील सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, जहाँ 104 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, हिंगणघाट उपजिल्हा अस्पताल में 54, पुलगांव ग्रामीण अस्पताल में 23, और आर्वी उपजिल्हा अस्पताल में 22 मामले सामने आए हैं। कुल मामलों की संख्या 299 है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।

जानें कहां कितने मरीज

  • जिला अस्पताल: 104
  • हिंगणघाट उपजिल्हा रुग्णालय: 54
  • पुलगाँव ग्रामीण रुग्णालय: 23
  • आर्वी उपजिल्हा रुग्णालय: 22
  • सेलू ग्रामीण रुग्णालय: 20
  • भिडी ग्रामीण रुग्णालय: 16
  • वडनेर ग्रामीण रुग्णालय: 15
  • देवली ग्रामीण रुग्णालय: 17
  • आष्टी व कारंजा: 10-10
  • समुद्रपूर: 08

छिड़काव के दौरान विषबाधा के मामले भी आए सामने

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों की तुलना में, कीटनाशक के छिड़काव के दौरान विषबाधा के 127 मामले सामने आए, जिनमें से 126 लोग इलाज के बाद स्वस्थ हो गए, जबकि 1 की मौत हुई। हालांकि, आत्महत्या के प्रयासों के लिए कीटनाशक का उपयोग एक अलग और अधिक गंभीर समस्या है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। यह डेटा प्रशासन और स्वास्थ्य विभागों के लिए एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता सेवाओं को मजबूत करना कितना आवश्यक है।

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