
वर्धा. नगर परिषद प्रशासन ने भूमिगत गटर योजना शहर में कार्यान्वित की, जिसका सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) श्मशानभूमि परिसर पुलफैल में तैयार किया गया है़ करोड़ों रुपए की लागत की योजना का ट्रायल लिया जा रहा है़ भूमिगत गटर के चेंबर से शहर का प्रतिदिन 3 दलाघ लीटर पानी एसटीपी पर पहुंचने से उस पर सफलतापूर्वक ट्रीटमेंट प्रक्रिया पूर्ण करने की जानकारी है.
शहर में करोड़ों रुपयों की लागत से भूमिगत गटर योजना का कार्य किया जा रहा है़ इसके लिए सड़क के बीचोबीच खुदाई कर पाइप लाइन बिछाई गई़ जिससे पक्की सीमेंट व डामर की सड़कें खराब होने से नागरिकों को अत्याधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है़ लेकिन घरों से निकलने वाला निकासी का पानी टायलेट का पानी भूमिगत गटर योजना की पाइप लाइन से एसटीपी पर ले जाकर उस पर ट्रीटमेंट करके पुन: उपयोग करने की यह संकल्पना है़ इससे नाले की गंदगी की समस्या शत प्रतिशत दूर होने का प्रशासन द्वारा दावा किया जा रहा है़ एसटीपी की ट्रायल शुरू होने से प्रतिदिन 3 दलाघ लीटर पानी पर ट्रीटमेंट शुरू होने की जानकारी है.
प्राथमिक स्थिति में सिवरेज के 700 कनेक्शन जोड़े जाने की जानकारी है़ इसमें लक्ष्मीनगर, गोंड प्लाट, आनंदनगर व कुछ मार्केट परिसर का एरिया है़ कुछ जगह अनुमति नहीं मिलने के कारण चेंबर के पाइप लाइन को इंटरकनेक्ट का कार्य प्रलंबित है़ इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज चौक, महादेवपुरा, अशोकनगर व अन्य कुछ हिस्सों का समावेश है़ इंटरकनेक्ट नहीं किए जाने से चेंबरों में बारिश का पानी भर जाने से सड़क से पानी निकलने की समस्या निर्माण हो रही है़ इंटरकनेक्ट का कार्य पूर्ण होते ही समस्या दूर होने की बात कही जा रही है़ इससे कनेक्शन जोड़ने अनुमति देने की मांग की जा रही है.
भूमिगत गटर का अनेक जगहों पर घटिया कार्य हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का भी निरंतर आरोप हो रहा है़ लेकिन यह भूमिगत गटर योजना सफल हुई तो सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निश्चित ही फायदा होगा़ श्मशानभूमि परिसर में तैयार किए इस प्लांट में शहर के निकासी का पानी पहुंच रहा है़ पानी पर पंप हाउस में पहुंचने के बाद स्क्रीनिंग की जाती है, जिससे पानी का कचरा निकलता है़ विभिन्न चरणों में दूषित पानी को पुन: उपयोग के लायक बनाया जा रहा है़ इन दिनों प्लांट से विभिन्न प्रक्रिया के बाद शुद्ध किया पानी परिसर के कुछ किसान फसलों के लिए उपयोग में ला रहे है़ भविष्य में इसी जगह पर खाद निर्मिति भी की जाएगी.






