
मिड डे मील स्कीम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Karanja ZP School Food Quality: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर शुरू हुई शालेय पोषण आहार योजना का ग्रामीण क्षेत्रों में बंटाढार हो गया है। इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक और संतुलित आहार प्रदान करना था, लेकिन कुछ विद्यालयों में पोषण आहार के नाम पर विद्यार्थियों को रोज केवल तिखा व पीला चावल दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
तहसील की 93 जिला परिषद स्कूलों में लगभग 4,088 विद्यार्थी इस योजना के तहत लाभार्थी हैं। हालांकि, इन विद्यार्थियों को दिया जाने वाला पोषण आहार बेहद घटिया गुणवत्ता का है। कई स्कूलों में विद्यार्थी पीला चावल और बेस्वाद खिचड़ी खाते हुए, उनका पोषण स्तर कहीं से भी सुधारता नहीं दिखाई दे रहा है।
शालेय पोषण आहार योजना के लिए तहसील स्तर पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में योजना की स्थिति अत्यंत खराब है। स्कूलों के रसोई घर की जांच, अनाज की गुणवत्ता और पोषण आहार के स्तर की परीक्षण नहीं किए जाने की चर्चा है।
सरकारी निधि कहां जा रही है, यह सवाल नागरिक उठा रहे हैं। प्रशासन को इस योजना का प्रभावी पालन और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों के पोषण आहार के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ऐसी अब मांग जोर पकड़ रही है।
सरकारी नियमों के अनुसार, विद्यार्थियों को सप्ताह में एक बार पूरक आहार के रूप में केले, बिस्कुट या राजगिरा के लड्डू देना अनिवार्य है। लेकिन कुछ स्कूलों में यह पूरक आहार भी नहीं दिया जाता। योजना के सभी स्तरों पर दुरावस्था देखी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों की पोषण स्थिति गंभीर बन गई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों का दोपहर का भोजन विद्यालय पोषण आहार पर निर्भर होता है। उनके माता-पिता मजदूरी के लिए घर से बाहर होते हैं, और उनके पूरे आहार की व्यवस्था विद्यालय का पोषण आहार ही करता है। लेकिन, निकृष्ट पोहषण आहार से सवाल उपस्थित हो रहे है।
शालेय पोषण आहार की जांच, केंद्र प्रमुख, शालेय पोषण आहार अधीक्षक, विस्तार अधिकारी व गुटशिक्षणाधिकारी कर रहे है। शालेय पोषण आहार संबंधित सभी स्कूलों की जांच करना जरूरी है। पंस शिक्षा विभाग प्रतिदिन स्कूलों में भेंट देकर जांच कर रहा है।
– नवभारत लाइव पर वर्धा से जगदीश कुर्डा की रिपोर्ट






