सिंचन योजना बनी 'कागजी', वर्धा में एक किसान तक सिमटा लाभ; लाखों का फंड लौटा

Wardha Irrigation Scheme: वर्धा में सिंचाई योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही सामने आई है। 2025-26 में सिर्फ एक किसान को लाभ मिला, जबकि 9 लाख रुपये फंड वापस करना पड़ा।
Irrigation Scheme Becomes a 'Paper Exercise': Benefits Confined to a Single Farmer in Wardha; Funds Worth Lakhs Returned
वर्धा सिंचन योजना( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Wardha Mukhyamantri Shashwat Sinchan Yojana: वर्धा किसानों के लिए स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शाश्वत सिंचन योजना वर्ष 2022-23 में शुरू की गई थी।

लेकिन इस योजना के क्रियान्वयन में कृषि विभाग की उदासीनता साफ नजर आ रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना का लाभकेवल एक ही किसान को दिया गया।

वहीं मार्च 2026 में इस योजना के 9.01 लाख रुपये का फंड सरकार को वापस करना पड़ा। मुख्यमंत्री शाश्वत सिंचन योजना के तहत इच्छुक किसानों को खेत-तालाब (शेततळे) उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

इस योजना में किसानों को अधिकतम 75 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2025-26 में वधां, सेलू, देवली, आर्वी और कारंजा तहसीलों को 30-30, जबकि हिंगनघाट और समुद्रपुर को 46-46 तथा आष्टी को 15 खेत तालाबों का लक्ष्य दिया गया था।

लेकिन वास्तविकता यह है कि समुद्रपुर तहसील में केवल एक ही किसान ने इस योजना का लाभ लेकर खेत तालाब बनवाया। इस किसान को 55,321 रुपये का अनुदान दिया गया।

योजना शुरू होने से अब तक केवल 33 किसानों को ही इसका लाभ मिल पाया है। वरिष्ठ अधिकारियों की नोटिस भी बेअसर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन न होने पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारियों को समय-समय पर कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। बावजूद जागरूकता अभियान केवल कागजों तक सीमित रहने का संकेत आंकड़ों से मिलता है।

इस वर्ष मंडलों को दिए गए लक्ष्य

जिले में कुल 17 मंडल है, पिछले वित्तीय वर्ष में आठ तहसीलों को लक्ष्य दिए गए थे, जबकि चालू वर्ष में मंडलों को लक्ष्य निर्धारित किए गए है। प्रत्येक मंडल को इस वर्ष 10 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य दिया गया है।

खास बात यह है कि हर साल इस योजना का फंड सार्च न होने के कारण वापस करना पड़ रहा है, जो कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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