वेंगुर्ला गावलीवाड़ा विवाद सुलझा, महाराष्ट्र सरकार ने 42 परिवारों को दी जमीन की राहत

Mumbai News: वेंगुर्ला गावलीवाड़ा में 100 साल पुराने जमीन विवाद का समाधान हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने 42 परिवारों के अतिक्रमण को नियमित किया है। प्रति परिवार 1500 वर्ग फुट भूमि निःशुल्क आवंटित है।
सीएम फडणवीस, चंद्रशेखर बावनकुले (pic credit; social media)
सीएम फडणवीस, चंद्रशेखर बावनकुले (pic credit; social media)
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Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने सिंधुदुर्ग जिले के वेंगुर्ला कैंप गावली वाड़ा में लंबे समय से लंबित जमीन विवाद को सुलझाते हुए 42 परिवारों के अतिक्रमण को नियमित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से न केवल इन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, बल्कि यह कदम उन समुदायों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो पीढ़ियों से इसी तरह के विवादों में फंसे हुए हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। बैठक में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विशेष प्रयास किए, जिनके चलते यह ऐतिहासिक निर्णय लिया जा सका। वेंगुर्ला नगर परिषद ने पहले ही यह प्रस्ताव पारित किया था कि गावली वाड़ा का अतिक्रमण 1905 से पहले का है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए सरकार ने समुदाय की मांग को मान्यता दी।

‘ऑक्युपेंसी क्लास-2’ की श्रेणी

सरकार ने यह निर्णय लिया है कि प्रत्येक परिवार को 1,500 वर्ग फुट भूमि निःशुल्क नियमित की जाएगी। इसके अतिरिक्त यदि किसी परिवार के पास अतिरिक्त भूमि है तो उसका मूल्य 1989 की दरों के आधार पर लिया जाएगा। स्थानीय निवासियों ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया है और अतिरिक्त हिस्से की लागत भरने पर सहमति जताई है।

नियमित की गई भूमि को ‘ऑक्युपेंसी क्लास-2’ की श्रेणी में रखा गया है। इस प्रावधान के तहत लाभार्थी बिना सरकारी मंजूरी के इस जमीन को बेच या हस्तांतरित नहीं कर पाएंगे। इस निर्णय के अंतर्गत कुल 2.93.20 हेक्टेयर भूमि को नियमित किया गया है, जिसमें से 0.69.32 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण हो चुका है और 2.23.88 हेक्टेयर भूमि खुली पड़ी है।

पूरे महाराष्ट्र में इस तरह के विवादों का समाधान होगा

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के सक्रिय प्रयास इस विवाद को हल करने में अहम साबित हुए। सिंधुदुर्ग दौरे के दौरान उन्होंने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी और जमीन विवाद को सुलझाने के लिए ठोस पहल की। उनका कहना है कि यह निर्णय केवल वेंगुर्ला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्यभर में इसी तरह के विवादों के समाधान के लिए एक मॉडल साबित होगा।

इस फैसले से गावली समुदाय को न केवल कानूनी मान्यता मिली है, बल्कि दशकों से चल रहे असुरक्षा के भाव से भी छुटकारा मिला है। यह कदम सरकार की उस नीति को भी उजागर करता है, जिसके तहत वह ऐतिहासिक दावों और समुदायों के हक में खड़ी है।

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