

Eknath Shinde Statement: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगामी नगर निकाय चुनावों के मद्देनजर विपक्षी खेमे पर तीखा हमला बोला है। ठाणे में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शिंदे ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की जनता अब नामचीन 'ब्रांड' नेताओं के पीछे भागने के बजाय विकास करने वाले हाथों को मजबूत कर रही है।
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति में अब तथाकथित "ब्रांड" नेताओं का जादू खत्म हो चुका है। शिंदे के मुताबिक, आज का जागरूक मतदाता केवल विरासत या उपनाम को देखकर वोट नहीं देता, बल्कि जमीन पर हुए बदलाव और विकास कार्यों को प्राथमिकता देता है।
महायुति सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए शिंदे ने पिछली महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार सक्रिय और प्रभावी है। हम पिछली सरकार की तरह नहीं हैं जो हर जनहित के काम पर 'स्थगन' (Stay Order) लगा देती थी। केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार होने से विकास कार्यों की गति और बढ़ गई है।"
मुख्यमंत्री ने कल्याण-डोंबिवली चुनाव के समीकरणों पर चर्चा करते हुए एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले ही महायुति के 21 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। शिंदे ने इसे विपक्ष की हार की शुरुआत बताते हुए कहा कि विपक्षी दल अब महायुति के उम्मीदवारों को चुनौती देने की स्थिति में भी नहीं बचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी खेमे ने उम्मीदवारों को प्रभावित करने की नाकाम कोशिशें भी कीं।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कल्याण-डोंबिवली को महायुति का अभेद्य किला बताते हुए अपने बेटे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यहां की जनता ने श्रीकांत शिंदे को तीन बार चुनकर यह साबित कर दिया है कि उन्हें केवल विकास की राजनीति पसंद है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी निकाय चुनावों में भी इसी तरह का परिणाम देखने को मिलेगा।
शिंदे ने अंत में कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिरता विकास के लिए अनिवार्य है। लाड़की बहिन योजना से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक, सरकार का हर कदम आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर सरकार के कार्यों का प्रचार करें और 'ब्रांड' की राजनीति करने वालों को करारा जवाब दें।