कृत्रिम तालाबों में अव्यवस्था का आलम (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Bhayandar: गणेशोत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष शहरभर में बड़ी संख्या में गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। न्यायालय के आदेश के बाद इस बार 6 फुट से कम ऊँचाई की प्रतिमाओं के लिए मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने विशेष रूप से 33 कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया। प्रशासन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करना था, लेकिन विसर्जन के दौरान देखने को मिली अव्यवस्था से भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।विधायक नरेंद्र मेहता ने मनपा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विसर्जन के बाद प्रतिमाओं को तालाब से तत्काल बाहर निकालकर मनपा कर्मी उन्हें किसी सामान की तरह फेंक देते हैं।
इसके कारण प्रतिमाओं के हाथ-पैर, मस्तक आदि क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “भक्त जिन विग्रहों को पूरे आदर और श्रद्धा से अपने घरों में विराजमान करते हैं, उन्हीं विग्रहों से इस तरह का अपमानजनक व्यवहार भक्तों के लिए असहनीय है।” मेहता ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे चाहें तो अपने घरों या सोसायटी परिसर में बड़े ड्रम या टब में पानी भरकर विसर्जन करें। प्रतिमा के पूर्णतः जल में घुल जाने के बाद उस जल का उपयोग पेड़-पौधों में करने से न केवल धार्मिक आस्था बनी रहेगी, बल्कि पर्यावरण का भी संरक्षण होगा।
मनपा द्वारा निर्मित इन कृत्रिम तालाबों में लगभग 3 फुट तक ही पानी भरा गया है। नतीजतन, प्रतिमाओं को पारंपरिक रूप से खड़ा कर डुबोने के बजाय लिटाकर विसर्जित किया जा रहा है। यही कारण है कि कई भक्त इसे परंपरा और आस्था के विपरीत मानते हुए आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
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विधायक मेहता ने यह भी कहा कि वर्तमान में मनपा में चुने हुए जनप्रतिनिधि न होने के कारण प्रशासनिक राज चल रहा है। अधिकारियों द्वारा मनमानी की जा रही है, जिससे आम जनता की भावनाओं की अनदेखी हो रही है। यह पूरा विवाद एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करता है कि पर्यावरण संरक्षण और परंपरा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जहाँ कृत्रिम तालाबों का उद्देश्य सराहनीय है, वहीं उनकी अधूरी तैयारी और असंवेदनशीलता से भक्तों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।
भाईंदर पश्चिम, मोर्वा गांव और मीरा रोड में भी गणेश भक्तों ने कृत्रिम तालाबों में विसर्जन से इनकार किया और प्रशासन की मनाही के बावजूद श्रद्धालु अपनी प्रतिमाओं को पारंपरिक रूप से नैसर्गिक तालाबों में लेकर पहुँचे और वहीं विसर्जन किए, जिससे मनपा प्रशासन और गणेश भक्तों में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हुई। भक्तों का कहना है कि “जब तक कृत्रिम तालाबों में उचित गहराई और व्यवस्था नहीं होगी, तब तक ऐसे विसर्जन की व्यवस्था धार्मिक परंपरा और श्रद्धा के साथ अन्याय है।