
भाजपा में शामिल होते कांग्रेस पार्षद (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thane Ambernath Politics: महाराष्ट्र के अंबरनाथ में नगर निकाय चुनाव के बाद राजनीतिक कलह तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों के पाला बदलने को ‘अवैध’ बताते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने का फैसला लिया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के चिन्ह पर जीतकर दलबदल करना संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने अंबरनाथ नगर निकाय में अपने 12 पार्षदों द्वारा पाला बदलकर भाजपा का दामन थामने के कदम को ‘अवैध और असंवैधानिक’ करार दिया है। पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता सचिन सावंत ने गुरुवार को घोषणा की है कि इन पार्षदों के खिलाफ अयोग्यता की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। सावंत के अनुसार, कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर निर्वाचित होने के बाद पाला बदलना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह देश के संविधान के प्रावधानों का भी स्पष्ट उल्लंघन है।
सचिन सावंत ने जोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के अधिकृत चिन्ह पर निर्वाचित होने के बाद कोई सदस्य स्वतंत्र समूह नहीं बना सकता और न ही किसी अन्य दल में शामिल हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इन पार्षदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई लड़ेगी और जल्द ही इन सभी बागी सदस्यों को कानूनी नोटिस जारी किए जाएंगे।
अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के लिए 20 दिसंबर को हुए मतदान के बाद वहां की राजनीति में एक अप्रत्याशित बदलाव देखा गया है। भाजपा ने स्थानीय स्तर पर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (एवीए) नामक एक नए बैनर तले गठबंधन बनाया है। इस गठबंधन में भाजपा के साथ उसके चिरप्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बागी पार्षद और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल हो गई है।
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इस रणनीतिक दांव के जरिए भाजपा ने अपनी ही सहयोगी शिवसेना को सत्ता से दूर कर दिया है, जो चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इस नए समीकरण ने अंबरनाथ नगर निकाय के नेतृत्व की कमान अब भाजपा और उसके नए सहयोगियों के हाथों में सौंप दी है।
इस राजनीतिक उठापटक के बीच कांग्रेस ने बुधवार को ही कड़ा फैसला लेते हुए अपने सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और प्रखंड अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था। इसके तुरंत बाद, बुधवार देर रात इन सभी निलंबित पार्षदों ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कदम से नगर निकाय में भाजपा की स्थिति और भी मजबूत हो गई है।
हालांकि, कांग्रेस अब इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देने के लिए तैयार है, जिससे आने वाले समय में अंबरनाथ की सत्ता को लेकर बड़ी कानूनी जंग छिड़ सकती है। यह राजनीतिक स्थिति उस घर की तरह है जिसकी नींव तो एक भरोसे पर रखी गई थी, लेकिन छत किसी और के खंभों पर खड़ी कर दी गई, जिससे अब पूरी इमारत के कानूनी अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है।






