
कांग्रेस पार्टी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Ambernath Congress block president suspended: अंबरनाथ क्षेत्र में महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने पर कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी ने अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक प्रेसिडेंट प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक प्रेसिडेंट प्रदीप पाटिल को एक पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा है, “हमने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं, लेकिन राज्य नेतृत्व या राज्य कार्यालय को बिना बताए, आपने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया और यह बात हमें मीडिया सोर्स से पता चली है। यह अच्छी बात नहीं है, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देशानुसार, आपको पार्टी से निलंबित किया जा रहा है।”
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक प्रेसिडेंट प्रदीप पाटिल को एक पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है, "हमने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं, लेकिन राज्य नेतृत्व या राज्य कार्यालय को बिना बताए, आपने… pic.twitter.com/r5Me2euNZT — ANI_HindiNews (@AHindinews) January 7, 2026
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अप्रत्याशित रूप से हाथ मिलाकर शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया है। इस फैसले ने महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नगर परिषद चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के इस साझा मोर्चे को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया है। खास बात यह है कि अंबरनाथ को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इसी क्षेत्र से एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सांसद हैं।
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हाल ही में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में कुल 60 सीटों के परिणाम घोषित हुए थे। इनमें शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन बहुमत से दूर रही। सीटों का बंटवारा इस प्रकार रहा:
संख्याबल के लिहाज से बीजेपी और कांग्रेस के एकजुट होने से बहुमत का आंकड़ा पूरा हो गया, जिससे शिवसेना के नेतृत्व में सत्ता गठन की संभावनाएं खत्म हो गईं।
शिंदे गुट के मजबूत माने जाने वाले इलाके में बीजेपी-कांग्रेस का साथ आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम को आने वाले निकाय चुनावों और राज्य की सियासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।






