
अंबरनाथ नगर परिषद व बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ambarnath Nagar Parishad Politics: महाराष्ट्र की सत्ता के समीकरणों के बीच अंबरनाथ नगर परिषद में मचे सियासी घमासान पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पार्षदों की अस्थिर निष्ठा को ‘विश्व भ्रमण’ करार देते हुए अदालत ने ठाणे कलेक्टर द्वारा गठबंधन की मान्यता के संबंध में जारी विवादित आदेशों पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने अंबरनाथ नगर परिषद के 4 एनसीपी सदस्यों के दलबदल पर सुनवाई करते हुए दिलचस्प टिप्पणी की। कोर्ट ने उनके बार-बार निष्ठा बदलने को “विश्व भ्रमण” कहा। अदालत ने चुटकी लेते हुए कहा कि आज ये सदस्य एक गुट के साथ हैं, कल किसी और के साथ थे और कल किसी तीसरे के साथ हो सकते हैं। इस टिप्पणी ने महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में जारी उठापटक को आईना दिखाया है।
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के बाद सत्ता का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया था। शिवसेना 60 में से 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन भाजपा (14), कांग्रेस (12) और राकांपा (4) ने हाथ मिलाकर ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ (AVA) बना ली। हैरानी की बात यह रही कि भाजपा ने अपनी राज्य सहयोगी शिवसेना को दरकिनार कर धुर विरोधी कांग्रेस के साथ स्थानीय स्तर पर हाथ मिलाया।
7 जनवरी को ठाणे कलेक्टर ने एवीए को ‘चुनाव-पूर्व गठबंधन’ के रूप में मान्यता दी थी। हालांकि, इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने अपने 12 सदस्यों को निलंबित कर दिया। इसके बाद एनसीपी के चार सदस्य अचानक पाला बदलकर शिवसेना के खेमे में चले गए।
बदले हुए समीकरणों के बीच, ठाणे कलेक्टर ने 9 जनवरी को शिवसेना और राकांपा के नए गठजोड़ को मान्यता दे दी और एवीए की मान्यता रद्द कर दी। इसी फैसले को एवीए ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने अब इस मामले को वापस कलेक्टर के पास भेज दिया है। कोर्ट के निर्देशानुसार कलेक्टर को अब भाजपा, कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर देना होगा। सभी पक्षों को 28 जनवरी तक अपनी लिखित दलीलें पेश करनी होंगी। कलेक्टर को इस सुनवाई के 21 दिनों के भीतर नया आदेश पारित करना होगा।
उच्च न्यायालय ने साफ किया कि जब तक कलेक्टर नया आदेश नहीं देते, तब तक 7 और 9 जनवरी के पुराने आदेशों पर रोक रहेगी। इसके अलावा, नए आदेश के आने के बाद भी उसे दो सप्ताह तक लागू नहीं किया जाएगा, ताकि असंतुष्ट पक्ष फिर से कानूनी विकल्प तलाश सकें। इस फैसले ने फिलहाल अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता पर काबिज होने की कोशिशों पर ‘ब्रेक’ लगा दिया है।






