Humayun Kabir Rejected PM Modi Claims: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम का दो दिवसीय दौरा किया था। जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुभारंभ करते हुए बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। अब इसे लेकर ममता को पूराने साथी और जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट और नागरिकता को लेकर हाल ही में काफी बयानबाजी हुई है। बीजेपी और मोदी जी का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस बांग्लादेश से आए लोगों को वोटर बना रही है। इस पर कई नेता जोर दे रहे हैं कि अनुप्रवेशकारी मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जो नाम हटाए गए हैं, उनकी संख्या बहुत कम है। कुल नामों में से लगभग 98,000 ही हटाए गए, जबकि बाकी का आंकड़ा काफी बड़ा दिखाया जा रहा है। इसमें 18 लाख मुस्लिम और 40 लाख गैर-मुस्लिमों का जिक्र किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। कोई गरीब लड़की से शादी करने या लंबे समय तक किसी को रोकने जैसी बातें भी मीडिया में चर्चा का हिस्सा बनी हैं। इसलिए जरूरी है कि इलेक्शन कमीशन पूरी निष्पक्षता से काम करे और सही आंकड़े सामने आएं। झूठ या अफवाह फैलाने से किसी को फायदा नहीं है।
Humayun Kabir Rejected PM Modi Claims: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम का दो दिवसीय दौरा किया था। जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुभारंभ करते हुए बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। अब इसे लेकर ममता को पूराने साथी और जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट और नागरिकता को लेकर हाल ही में काफी बयानबाजी हुई है। बीजेपी और मोदी जी का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस बांग्लादेश से आए लोगों को वोटर बना रही है। इस पर कई नेता जोर दे रहे हैं कि अनुप्रवेशकारी मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जो नाम हटाए गए हैं, उनकी संख्या बहुत कम है। कुल नामों में से लगभग 98,000 ही हटाए गए, जबकि बाकी का आंकड़ा काफी बड़ा दिखाया जा रहा है। इसमें 18 लाख मुस्लिम और 40 लाख गैर-मुस्लिमों का जिक्र किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। कोई गरीब लड़की से शादी करने या लंबे समय तक किसी को रोकने जैसी बातें भी मीडिया में चर्चा का हिस्सा बनी हैं। इसलिए जरूरी है कि इलेक्शन कमीशन पूरी निष्पक्षता से काम करे और सही आंकड़े सामने आएं। झूठ या अफवाह फैलाने से किसी को फायदा नहीं है।






