नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे पर लगा ब्रेक! नापजोख का काम ठप, किसानों रखी तीन बड़ी मांगें

Shaktipeeth Expressway: नागपुर-गोवा शक्तिपीठ महामार्ग के नापजोख कार्य को किसानों के विरोध के चलते सोलापुर व अन्य जिलों में रोक दिया गया है। किसान जमीन के वास्तविक बाजार भाव समेत तीन मांगों पर अड़े।
Nagpur-Goa Shaktipith Expressway
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Shaktipeeth Expressway Land Measurement Halted: महाराष्ट्र सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नागपुर-गोवा शक्तिपीठ महामार्ग किसानों के बढ़ते विरोध के चलते नापजोख के मामले में फिलहाल ठप पड़ गया है। सोलापुर जिले में नापजोख को तत्काल के लिए टाल दिया गया है।

जानकारों का मानना है कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव खत्म होने के बाद ही एक बार फिर नापजोख की प्रक्रिया को गति मिलेगी। यह महामार्ग राज्य के चार प्रमुख हिस्सों - विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र और कोकण को आपस में जोड़ेगा। नागपुर-गोवा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 802 से 805 किलोमीटर होगी।

विदर्भ को गोवा से जोड़ेगा एक्सप्रेसवे

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे वर्धा जिले के पवनार से शुरू होकर गोवा की सीमा के से लगे सिंधुदुर्ग जिले के पात्रादेवी तक जाएगा। यह सिक्स लेन का हाईवे होगा, जिससे नागपुर से गोवा का सफर महज 8-10 घंटे में पूरा हो सकेगा। यह महामार्ग वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग इन जिलों से गुजरेगा। कोल्हापुर जिले में किसानों का नापजोख को जबरदस्त विरोध हो रहा है, इसलिए प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि विरोध वाले कुछ गांवों को छोड़कर वैकल्पिक रूट से महामार्ग बनाया जा सकता है या नहीं।

प्रभावित किसानों ने की 3 मांगें

प्रभावित किसानों ने महाराष्ट्र राज्य रोड विकास महामंडल के महाव्यवस्थापक तथा पुणे अपर जिलाधिकारी को लिखित प्रस्ताव भेजकर 3 प्रमुख मांगें रखी है।

पहली मांग यह है कि नापजोख प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रहे, इसलिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय मुआवजा निर्धारण समिति में एक किसान प्रतिनिधि को आमंत्रित सदस्य' के रूप में शामिल किया जाए।

दूसरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि रजिस्टर्ड दस्तावेजों में दिखाई गई जमीन की कीमतें असल बाजार भाव से बहुत कम होती है। इसे ठीक करने के लिए किसानों ने एक स्वतंत्र खोज समिति बनाने की मांग की है जिसमें प्रांताधिकारी, निबंधक, तहसीलदार, तकनीकी विशेषज्ञ, स्थानीय जनप्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि शामिल हों।

यह समिति पिछले 3 वर्षों में हुए सभी जमीन सौदों की वास्तविक जांच करेगी और उसके आधार पर सही बाजार मूल्य तय करके उचित मुआवजा निर्धारित किया जाएगा, किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक ये मागे पूरी नहीं होती, नापजोख आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

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