
कपास की कीमत (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Cotton Farmers Crisis: इस साल कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। जहां सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीद रही है वहीं निजी व्यापारी किसानों को एमएसपी से 1,400 प्रति क्विंटल से भी कम दाम दे रहे हैं। लंबी रेशे वाली कपास का एमएसपी 8,110 प्रति क्विंटल तय किया गया है लेकिन बाजार में यह 6,700 से 6,800 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है।
इस वजह से किसान सरकारी खरीद पर ही भरोसा कर रहे हैं। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने इस साल किसानों के लिए ‘कपास किसान एप’ पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी कर दिया है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि सिर्फ असली किसान ही अपना कपास बेच सकें। एप पर किसानों को अपनी जमीन और जरूरी कागजात की जानकारी देनी होती है।
पूरे महाराष्ट्र में अब तक 4.89 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जो कपास उगाने वाले किसानों की कुल संख्या से काफी कम है। सीसीआई ने रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है, ताकि किसानों को आराम से अपना स्लॉट बुक करने का मौका मिल सके।
सीसीआई ने पूरे राज्य में 168 खरीद केंद्र खोले हैं और अब तक 9,000 गांठ (45,000 क्विंटल) कपास खरीद चुकी है। निजी बाजारों में कपास की आवक कम होने की एक वजह यह भी है कि किसान सरकारी खरीद को तरजीह दे रहे हैं लेकिन एप पर रजिस्ट्रेशन की झंझट की वजह से कई किसान अपना माल रोके हुए हैं। बेमौसम बारिश के कारण कपास में नमी की मात्रा ज्यादा होना भी एक बड़ी समस्या है। सीसीआई 12% से ज्यादा नमी वाले कपास को नहीं खरीदती। सेल्फ-रजिस्ट्रेशन के बाद राज्य सरकार को किसानों के विवरण की पुष्टि करनी होती है।
यवतमाल के किसान गजानन सिंगवारार बताते हैं कि वे तो एप पर रजिस्टर हो गए लेकिन कई दूसरे किसानों को यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल लग रही है। फिर भी इस साल कपास के कम दाम को देखते हुए उन्हें सीसीआई को ही अपना माल बेचना एकमात्र रास्ता दिख रहा है लेकिन सीसीआई के खरीद केंद्र हर जगह नहीं हैं। ऐसे में किसानों को मजबूरी में निजी व्यापारियों को अपना कपास बेचना पड़ता है।
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एक दूसरे किसान ने बताया कि व्यापारी अक्सर उन्हें उधार देते हैं और फिर कपास बिकने के बाद अपना पैसा वसूल लेते हैं। वहीं सीसीआई के एक अधिकारी का कहना है कि जिन इलाकों में कम से कम 3,000 हेक्टेयर में कपास की खेती होती है और जहां जिनिंग मिलें हैं वहां खरीद केंद्र खोले गए हैं। यवतमाल जैसे कपास उत्पादक जिले में करीब 18 केंद्र खोले गए हैं, जबकि अमरावती में 14 केंद्र हैं।
सरकार द्वारा 31 दिसंबर तक कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी हटाए जाने के बाद से कपास के दाम गिरे हैं। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते यह फैसला लिया गया था। इस फैसले का असर यह हुआ कि बाजार में कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चले गए हैं। किसानों को उम्मीद है कि सीसीआई की खरीद से उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
उन्हें उम्मीद है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया आसान होगी और वे बिना किसी परेशानी के अपना कपास बेच पाएंगे। एप पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें। साथ ही खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने और उनकी पहुंच को बेहतर बनाने की भी मांग की जा रही है।






