'मेरी हत्या की सुपारी दी गई है', मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल का सनसनीखेज आरोप

Manoj Jarange Patil Murder Plot Allegation: मनोज जरांगे पाटिल ने आरोप लगाया है कि उनकी हत्या की सुपारी दी गई है। उन्होंने सरकार को सगे-संबंधी कानून और सातारा गजेटियर पर नई चेतावनी दी।
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Manoj Jarange Patil (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Manoj Jarange Patil: मराठा आरक्षण की लड़ाई के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मचा दी है। सोलापुर जिले के माचनूर (मंगलवेड़ा) में आयोजित शिव जयंती कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि उनकी हत्या के लिए 'सुपारी' दी गई है। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि मराठा समाज के बच्चों के हक के लिए लड़ने के कारण वे कुछ ताकतवर लोगों के दुश्मन बन गए हैं, जो अब उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे हैं।

इस बयान के बाद मराठा आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है।

मेरी हत्या की सुपारी दी गई है

मनोज जरांगे पाटिल ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनके करीबी लोगों को लालच देकर तोड़ा जा रहा है और उनके खिलाफ बयानबाजी करवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें जान से मारने की योजना बना रहे हैं। पाटिल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "किसी जाति को खुश करने के लिए झूठ मत बोलिए, सच का साथ दीजिए। मैं मराठा समाज के बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहा हूं, और इसके लिए मैं अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार हूं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे ऐसी धमकियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

सरकार को चेतावनी और सातारा गजेटियर

जरांगे पाटिल ने सरकार को आगाह किया कि यदि पश्चिम महाराष्ट्र में 'सातारा गजेटियर' (सगे-संबंधी नियम) को तत्काल प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मराठा समुदाय के धैर्य की परीक्षा ले रही है। पाटिल ने कहा कि वे किसी जाति के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने समाज के हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। फिलहाल, उनके हत्या की साजिश वाले आरोपों ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है और मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।

कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल

मूल रूप से बीड जिले के रहने वाले मनोज जरांगे पाटिल एक साधारण किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो जालना के अंतरवाली सराटी में अपने भूख हड़ताल के कारण रातों-रात पूरे देश में चर्चा में आए।

मूल निवास: वह मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड जिले के शिरूर तालुका के रहने वाले हैं, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से जालना जिला रहा है।

साधारण जीवन: वह एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। आंदोलन में आने से पहले वह खेती करते थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए छोटे-मोटे काम करते थे।

शिवबा संगठन: उन्होंने मराठा समाज के हितों की रक्षा के लिए 'शिवबा संगठन' (Shivba Sanghatana) नामक संस्था की स्थापना की थी।

क्या है पाटिल का मराठा आंदोलन?

मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन मुख्य रूप से मराठा समुदाय को कुनबी (OBC) का दर्जा दिलाने पर केंद्रित है। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक रूप से मराठा और कुनबी एक ही हैं।

प्रमुख मांग: वे चाहते हैं कि जिन मराठा परिवारों के पास 'निजाम काल' के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उनके सभी 'सगे-संबंधियों' (रक्त संबंधियों) को भी कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए।

आंदोलन का आधार: उनका मराठा आरक्षण आंदोलन तब वैश्विक चर्चा में आया जब जालना के अंतरवाली सराटी में भूख हड़ताल के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई तक लाखों लोगों का मोर्चा निकाला, जिससे सरकार को 'सगे-संबंधी' अधिसूचना जारी करने पर मजबूर होना पड़ा।

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