
जयकुमार गोरे और कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे (सोर्सः सोशल मीडिया)
Solapur Politics: सोलापुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों से पहले जिले का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे और बीजेपी के गार्डियन मिनिस्टर जयकुमार गोरे के बीच ज़बरदस्त ज़ुबानी जंग देखने को मिल रही है। दोनों नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
गार्डियन मिनिस्टर जयकुमार गोरेकी आलोचना का जवाब देते हुए सांसद प्रणीति शिंदे ने उन्हें ‘मौकापरस्त’ करार दिया। उन्होंने कहा,“जयकुमार गोरेमूल रूप से कांग्रेसी हैं, इसलिए उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लिखा गया मेरा पत्र पढ़ा होगा। वे बीजेपी के झांसे में आकर उस पार्टी में शामिल हो गए। सोलापुर एक सभ्य शहर है, बाहरी लोगों को आकर यहां का राजनीतिक स्तर नहीं गिराना चाहिए। कुछ लोगों के सिर पर सत्ता चढ़ गई है।”
प्रणीति शिंदे के बयान पर पलटवार करते हुए जयकुमार गोरे ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे का उल्लेख करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,“सुशील कुमार शिंदे ने जीवनभर कांग्रेस को बढ़ाया और कार्यकर्ताओं का ध्यान रखा। लेकिन प्रणीति शिंदे ने कांग्रेस को कमजोर किया। जब पार्टी कार्यकर्ताओं को उनकी ज़रूरत थी, तब उन्होंने उन्हें छोड़ दिया। आज वह सिर्फ़ दो कॉर्पोरेटर चुने जाने से खुश हैं, जबकि बीजेपी के 87 कॉर्पोरेटर जीतकर आए हैं।”
प्रणीति शिंदे द्वारा सम्मान की बात किए जाने पर जयकुमार गोरेने तंज कसते हुए कहा, “शुरुआत में उन्होंने मेरा नाम बहुत सम्मान से लिया था, इसलिए अब उन्हें मेरी बातें माननी ही पड़ेंगी। दूसरों का सम्मान करना खुद से सीखना चाहिए, तभी लोग आपका सम्मान करते हैं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रणीति शिंदे द्वारा की गई ‘मौकापरस्ती’ पर वे चाहें तो विस्तार से बोल सकते हैं।
इस राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच प्रणीति शिंदे ने आगामी ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर अहम संकेत दिए। उन्होंने कहा, “जहां भी संभव होगा, सोलापुर ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में महा विकास अघाड़ी का गठबंधन किया जाएगा। बीजेपी चाहे कितना भी पैसा खर्च करे या EVM का सहारा ले, कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और उन्हें कड़ी टक्कर देगी।”
फिलहाल सोलापुर में इन दोनों नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में नाराज़गी और शहरी क्षेत्रों में बदलते वोटिंग पैटर्न को आने वाले चुनावों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।






