महाड चुनाव हिंसा: हाई कोर्ट की फटकार के बाद बड़ा एक्शन! मंत्री भरत गोगावाले के बेटे विकास ने किया आत्मसमर्पण

Mahad Election Violence: महाराष्ट्र के महाड में चुनावी हिंसा मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद मंत्री भरत गोगावाले के बेटे विकास गोगावाले ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
Mahad Election Violence Vikas Gogawale Surrender
विकास गोगावले व मंत्री भरत गोगावले (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Vikas Gogawale Surrender: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाड हिंसा मामले में सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत की नाराजगी के ठीक एक दिन बाद, राज्य के मंत्री भरत गोगावाले के बेटे विकास गोगावाले ने शुक्रवार सुबह पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

रायगड जिले के महाड में नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़प के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथों लिया था। न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा था कि "क्या राज्य में कानून का राज है?" अदालत ने यहाँ तक कह दिया था कि क्या मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि वे अपने ही कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहे, जिनका बेटा हफ्तों से फरार है।

पुलिस स्टेशन पहुंचे विकास और महेश गोगावाले

बॉम्बे हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने शुक्रवार को सूचित किया कि मामले के मुख्य आरोपी विकास गोगावाले और उनके चचेरे भाई महेश गोगावाले ने महाड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया। बता दें कि विकास और महेश दोनों ने पहले अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें अदालत से कोई राहत नहीं मिली थी।

क्या है महाड चुनाव हिंसा का मामला?

यह पूरा विवाद महाड में हुए स्थानीय चुनावों के दौरान शुरू हुआ था। उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही दल राज्य में भाजपा के साथ सत्ता में साझीदार हैं। इस झड़प के बाद दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।

अदालत इस दौरान एक अन्य आरोपी श्रेयांश जगताप की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति जामदार ने स्पष्ट किया कि अपराध की प्रकृति गंभीर है, इसलिए जमानत का सवाल ही नहीं उठता। अदालत के कड़े रुख को देखते हुए जगताप ने अपनी याचिका वापस ले ली। न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि अब पुलिस को जगताप को भी गिरफ्तार करना होगा, भले ही वह पूर्व मंत्री का बेटा हो।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com