महाराष्ट्र में RTE एडमिशन में 1 किमी के दायरे की शर्त पर रोक, हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना को बताया 'अवैध'

RTE Maharashtra Admission: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को झटका देते हुए RTE दाखिलों में 1 किमी की दूरी और स्कूलों के चयन की सीमा वाली शर्त पर रोक लगा दी है। जानें क्या है पूरा मामला।
Bombay High Court stays Maharashtra government's 1 km radius condition for RTE admissions
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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RTE Admission 1 KM Rule Scrapped: शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से कुछ शर्तों के साथ अधिसूचना जारी की गई। 12 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना में संबंधित स्कूल के 1 किमी के दायरे के अंतर्गत निवास करने वालों को ही प्रवेश की अनुमति मिलने की शर्त भी लागू की गई। इस तरह की कई कठिन शर्तों के साथ जारी इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए आशीष फुलझेले, वैभव कांबले, अनिकेत कुत्तरमारे और अन्य की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

इस याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए शिक्षा के अधिकार के तहत होने वाले दाखिलों में लगाई गई 1 किलोमीटर की भौगोलिक सीमा और स्कूलों के चयन की सीमा पर रोक लगा दी है। अदालत ने माना कि सरकार का यह कदम न केवल पिछले न्यायिक आदेशों का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार के भी खिलाफ है।

कार्यान्वयन पर कई कड़े प्रतिबंध

याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 फरवरी 2026 को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी थी जिसमें RTE की धारा 12(1)(c) के कार्यान्वयन पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। अदालत ने सरकारी आदेश के मुख्य रूप से 2 प्रावधानों पर रोक लगाई है जिनमें ऑनलाइन सिस्टम में ऐसी व्यवस्था की गई थी कि गूगल मैप पर निवास स्थान चुनने के बाद केवल 1 किलोमीटर के भीतर के स्कूल ही दिखाई देंगे। इसी तरह से अभिभावकों को अधिकतम केवल 10 स्कूल चुनने की अनुमति दी गई थी और पोर्टल पर केवल वे ही स्कूल प्रदर्शित होते जो घर से 1 किलोमीटर के दायरे में हों। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता, जयना कोठारी, अधि। पायल गायकवाड, अधि। दीपांकर कांबले ने पैरवी की।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ये शर्तें 'अखिल भारतीय समाजवादी अध्यापक सभा' मामले में 19 जुलाई 2024 को दिए गए पिछले फैसले का स्पष्ट उल्लंघन हैं। उस फैसले में स्पष्ट कहा गया था कि RTE एक्ट की धारा 12(1)(c) में दूरी की कोई शर्त नहीं है। कोई भी नियम मूल अधिनियम से ऊपर नहीं हो सकता। निजी बिना सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे पड़ोस के वंचित और कमजोर वर्गों के बच्चों को दाखिला दें, भले ही वहां सरकारी स्कूल मौजूद हों। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार द्वारा लगाए गए ये प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21A (शिक्षा का अधिकार) के प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होते हैं। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिस्टम में आवश्यक बदलाव करे, ताकि दाखिले RTE अधिनियम और उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनों के अनुसार सुनिश्चित किए जा सकें।

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