Pune Zilla Parishad Elections: एनसीपी टूटने के बाद पहली अग्निपरीक्षा, पुणे में पवारों की चुनौती

Maharashtra Local Body Elections: एनसीपी विभाजन के बाद होने वाले पहले पुणे जिला परिषद चुनाव में अजीत पवार की साख दांव पर है। बारामती को छोड़ बाकी तालुकों में उन्हें कड़ी चुनौती मिलेगी।
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पुणे जिला परिषद (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: पुणे जिला परिषद पर पवार परिवार का दबदबा बनाए रखने के लिए आगामी चुनाव में डीसीएम अजीत पवार की साख दांव पर लगी होगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट के बाद यह पहला चुनाव है और चूंकि सभी महत्वपूर्ण निर्णय अजीत पवार के हाथों में हैं।

इसलिए पूरे जिले की नजरें उनकी चुनावी रणनीति पर टिकी पुणे जिला परिषद के हालिया इतिहास को देखें तो इस पर हमेशा से बारामती के पवार परिवार का वर्चस्व रहा है। लेकिन उस समय राष्ट्रवादी कांग्रेस एकजुट थी और पार्टी का नेतृत्व शरद पवार के हाथों में था।

अब पार्टी के विभाजन के बाद इस किले को बचाए रखने की पूरी जिम्मेदारी अजीत पवार के कंधों पर आ गई है। यदि अतीत पर नजर डालें तो पुणे जिले में राष्ट्रवादी कांग्रेस या उससे पहले कांग्रेस का विरोध करने वाले तालुका, गुट या समूह बहुत कम थे।

इसी कारण ये चुनाव कब होकर गुजर जाते थे, इसका पता भी नहीं चलता था और जिला परिषद पर निर्विवाद रूप से कांग्रेस और बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस का ही कब्जा रहता था। दो तालुका को छोड़कर बाकी जगह मिलेगी कड़ी चुनौती लेकिन वर्तमान में बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में वैसी स्थिति नहीं रह गई है।

अब पुणे जिले के प्रत्येक तालुका के शक्तिशाली नेता किसी न किसी पार्टी का सहारा लेकर अजीत पवार को टक्कर देने के लिए तैयार खड़े हैं। बारामती और आंबेगांव इन दो तालुकों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में अजीत पवार और उनकी पार्टी को बेहद कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इंदापुर में स्थानीय 'भीमा कृष्णा गठबंधन' के पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल, भाजपा नेता प्रवीण माने और पूर्व विधायक यशवंत माने जैसी हस्तियों ने इस चुनाव को काफी दिलचस्प बना दिया है।

वहीं पुरंदर में शिवसेना के पूर्व मंत्री एवं विधायक विजय शिवतारे और भाजपा के पूर्व विधायक संजय जगताप जैसे दो दिग्गज नेता राष्ट्रवादी की सीटें कम करने के लिए मैदान में डटे हैं। दौंड की बात करें तो वहां भाजपा के विधायक राहुल कुल का मजबूत प्रभाव है, जिसके कारण वहां भी अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस को कड़ी मशक्कत करनी होगी।

अजीत पवार की पार्टी को मिलेगी कड़ी टक्कर

खेड तालुका में विधायक बाबाजी काले और अतुल देशमुख जैसे नेता अजीत पवार की राष्ट्रवादी के विरोध में खड़े हैं। वहां पूर्व विधायक दिलीप मोहिते पाटिल का विरोध करने के एक सूत्रीय एजेंडे के तहत देशमुख, काले और अन्य नेता एकजुट होकर अजीत पवार की पार्टी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

जुन्नर में भी निर्दलीय, लेकिन अब शिंदे सेना में शामिल विधायक शरद सोनवणे राष्ट्रवादी से लोहा लेने के लिए तैयार हैं। जुन्नर नगरपालिका पर वर्चस्व कायम कर उन्होंने अपनी ताकत साबित कर दी है। अब जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में पूर्व विधायक अतुल बेनके और शरद सोनवणे के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिलेगा।

शिरूर में भी ऐसी ही स्थिति

विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पूर्व विधायक अशोक पवार अभी भी मजबूती से डटे हुए हैं। इसलिए उनसे मुकाबला कर शिरूर में राष्ट्रवादी कांग्रेस की ज्यादा से ज्यादा सीटें जिताना अजीत पवार के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। यदि दोनों राष्ट्रवादी गुट मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो यहां की स्थिति बदल सकती है, लेकिन भाजपा की बड़ी ताकत को देखते हुए संघर्ष अनिवार्य होगा।

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