मतीन पटेल की संपत्तियों पर चले बुलडोजर का मामला, हाईकोर्ट ने दी याचिका में संशोधन की अनुमति, 15 जून को सुनवाई

छत्रपति संभाजीनगर मनपा द्वारा Matin Patel AMIM पार्षद की संपत्तियों को गिराए जाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका में संशोधन की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को।
Case regarding the bulldozing of Matin Patel's properties: High Court grants permission to amend petition; hearing scheduled for June 15
उच्च न्यायालय की खंडपीठ (सोर्स: फाइल फोटो)
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Matin Patel AMIM Update: महानगरपालिका (मनपा) द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एमआईएम पार्षद मतीन पटेल और नारेगांव परिसर के अन्य निवासियों की संपत्तियों पर की गई कार्रवाई का मामला अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुँच गया है। बॉम्बे उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को उनकी मूल याचिका में संशोधन (Amendment) करने की अनुमति दे दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

महानगरपालिका ने 9 मई 2026 को नारेगांव परिसर में कुछ संपत्तियों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने के लिए निष्कासन नोटिस जारी किया था। इस नोटिस को अवैध और बिना उचित प्रक्रिया' के बताया गया। इसके विरोध में पार्षद मतीन पटेल, हनीफ खान युसुफ खान और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका मुख्य तर्क यह था कि प्रशासन उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रहा है।

कार्रवाई के बाद बदला याचिका का स्वरूप

जब यह मामला अदालत में लंबित था, तभी 13 मई को मनपा प्रशासन ने कड़े पुलिस बंदोबस्त के बीच बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने मतीन पटेल की तीन संपत्तियों सहित अन्य निर्माणों को अवैध ठहराते हुए उन पर बुलडोजर चला दिया। चूँकि अब संपत्तियाँ पहले ही हटाई जा चुकी हैं, इसलिए याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और अब केवल नोटिस को चुनौती देना काफी नहीं है, बल्कि की गई कार्रवाई के खिलाफ भी कानूनी पक्ष रखना जरूरी है।

अदालत की सुनवाई और संशोधन की मंजूरी

सोमवार को न्यायमूर्ति सिद्धेश्वर ठोंबरे की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रियंका शिंदे ने दलील पेश करते हुए कहा कि संपत्तियों के विध्वंस के बाद मामले का कानूनी स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, अतः नई परिस्थितियों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए याचिका में संशोधन की अनुमति दी जानी चाहिए।

खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए याचिका में संशोधन की अनुमति प्रदान की। इस मामले में महानगरपालिका की ओर से अधिवक्ता संभाजी टोपे उपस्थित रहे, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभय सिंह भोसले, कृष्णा रोडगे और प्रियंका शिंदे पक्ष रख रहे हैं।

नारेगांव में तनाव और उठते सवाल

गौरतलब है कि 13 मई की कार्रवाई के दौरान नारेगांव परिसर में काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। प्रशासन की इस 'आनन-फानन' में की गई कार्रवाई पर अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करने से बचना चाहिए था।

अब 15 जून को होने वाली अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संशोधित याचिका के आधार पर अदालत प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई पर क्या रुख अपनाती है।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

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