
भाजपा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Pune News: पुणे महानगरपालिका (मनपा) चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी रणनीति को स्पष्ट करते हुए महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखा है।
प्रत्याशियों की अंतिम सूची और ‘एबी फॉर्म’ के वितरण के साथ ही भाजपा ने जिस रणनीति को सामने रखा है, उसे पार्टी ‘पुणे मॉडल’ के रूप में प्रचारित कर रही है।
भाजपा ने कुल 165 मनपा सीटों में से 91 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर स्थानीय राजनीति में नया इतिहास रचा है। यह फैसला न केवल आरक्षण की अनिवार्यता तक सीमित है, बल्कि पार्टी की सोच में आए बदलाव को भी दर्शाता है।
पार्टी ने महिलाओं को केवल आरक्षित वार्डों तक सीमित नहीं रखा। भाजपा ने 9 सामान्य (अनारक्षित) वार्डों में भी महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर पुरुष दावेदारों पर उन्हें तरजीह दी है। इन महिला नेताओं में निवेदिता एकबोटे, संगीता दांगट, अर्चना जगताप, विनया बहुलिकर, कविता वैरागे, वीणा घोष, पल्लवी जावले, रेश्मा भोसले और रंजना टिलेकर जैसे नाम शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘लाड़ली बहिन योजना’ की सफलता के बाद भाजपा अब महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्धारण की अहम भूमिका में लाना चाहती है। पुणे जैसे शिक्षित और प्रगतिशील शहर में यह रणनीति खास तौर पर मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ के नाम से पहचाने जाने वाले पुणे में शिक्षित, सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला नेताओं को आगे लाकर भाजपा एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि इससे न केवल महिला मतदाताओं में भरोसा बढ़ेगा, बल्कि शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर भी नई सोच सामने आएगी।
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पुणे मनपा चुनाव में भाजपा का यह प्रयोग आने वाले समय में महाराष्ट्र की शहरी राजनीति की दिशा तय कर सकता है। महिला नेतृत्व को व्यापक मंच देकर पार्टी ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों में महिला शक्ति उसकी रणनीति का अहम आधार रहने वाली है।






