
शीतल देवरुखकर-शेठ और आदित्य ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Politics: चुनावी माहौल के बीच बड़ी बगावत बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, मुंबई की राजनीति में उथल-पुथल तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की तेजतर्रार उपनेता और युवा सेना की कोर कमेटी सदस्य शीतल देवरुखकर-शेठ ने संगठन से इस्तीफा दे दिया।
आदित्य ठाकरे की करीबी सहयोगियों में गिनी जाने वाली शीतल का जाना पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में लेंगी सदस्यता पार्टी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा करते हुए शीतल देवरुखकर-शेठ ने स्पष्ट किया कि उनकी अगली मंजिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है।
उन्होंने बताया कि वह जल्द ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की उपस्थिति में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगी। उनके इस फैसले से बीएमसी चुनाव के समीकरणों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि वह युवा वोटरों के बीच अच्छी पकड़ रखती हैं। उन्होंने रवींद्र चव्हाण की मौजूदगी में भाजपा में प्रवेश किया।
शीतल शेठ केवल उपनेता ही नहीं थीं, बल्कि उन्होंने पार्टी की विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों पर सीधे आदित्य ठाकरे के साथ काम किया था। वह मुंबई विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य होने के साथ-साथ युवा सेना के नीतिगत फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। सूत्रों का कहना है कि शीतल को पार्टी ने बीएमसी चुनाव के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जब उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी हुई, तो उनका नाम नदारद था।
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कहा जा रहा है कि शीतल देवरुखकर-शेठ का टिकट कटना ही इस बगावत की मुख्य वजह बनी। चुनाव के लिए उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी के इस फैसले ने उन्हें नाराज कर दिया। अब उनके भाजपा में जाने से उद्धव गुट को विशेष रूप से युवा सेना के मोर्चे पर कड़ी चुनौती मिल सकती है।
15 जनवरी को होगा शक्ति परीक्षण मुंबई बीएमसी के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना अगले दिन यानी 16 जनवरी को की जाएगी। चुनाव से चंद दिनों पहले शीतल शेठ जैसे अनुभवी नेता का साथ छोड़ना यह संकेत देता है कि बीएमसी की सत्ता की लड़ाई अब और भी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाली है।






