पुणे महापालिका चुनाव (pic creditl; social media)
Maharashtra News: पुणे महापालिका चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशासन द्वारा घोषित प्रभाग रचना के प्रारूप पर विवाद गहराता जा रहा है। 22 अगस्त को प्रशासन ने प्रारूप रचना जारी की थी और आपत्तियां व सुझाव दर्ज कराने के लिए 4 सितंबर तक की समयसीमा तय की थी। इसी दौरान अब तक कुल 396 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। इसमें आम नागरिकों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों ने भी सक्रिय रूप से आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
सबसे अधिक 294 आपत्तियां मुख्य चुनाव कार्यालय में प्राप्त हुई हैं। वहीं, क्षेत्रीय कार्यालयों में भी दर्जनों आपत्तियां पहुंची हैं। सिंहगढ़ रोड कार्यालय में 33, ढोले पाटिल कार्यालय में 16 और धनकवडी-सहकार नगर कार्यालय में 12 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। बाकी कार्यालयों में गिनी-चुनी शिकायतें आईं।
विशेष रूप से प्रभाग क्रमांक 15 मांजरी बु. – साडेसतरा नली के लिए सबसे ज्यादा 160 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। वहीं, प्रभाग 34 नहें-वाडगांव से 126 आपत्तियां प्राप्त हुईं। इसके अलावा, 41 प्रभागों में से 12 प्रभाग ऐसे हैं, जहां अब तक एक भी आपत्ति नहीं आई है। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी बीजेपी प्रभाव वाले प्रभाग हैं। ऐसे में यह स्पष्ट हो रहा है कि आगामी महापालिका चुनाव में प्रभाग रचना का मुद्दा सबसे अहम और विवादित रहने वाला है।
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इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। मनसे शहराध्यक्ष साईनाथ बाबर ने मनपा आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और कहा कि गणेशोत्सव के कारण नागरिक उत्सव की तैयारियों में व्यस्त हैं। ऐसे में उन्हें आपत्तियां और सुझाव दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। बाबर का आरोप है कि मौजूदा प्रभाग रचना सत्ता पक्ष के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे नागरिकों में असंतोष बढ़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समयसीमा नहीं बढ़ाई गई तो नागरिकों की अपेक्षित भागीदारी नहीं हो पाएगी।
स्पष्ट है कि बढ़ती आपत्तियों और राजनीतिक दबाव के चलते प्रभाग रचना का मुद्दा आने वाले चुनाव में बड़ा राजनीतिक रणक्षेत्र बनने जा रहा है।