
अजित पवार और अंजलि दामनिया (सौ. सोशल मीडिया )
Parth Pawar Land Scam: ऐसा लगता है कि मुंढवा जमीन घोटाले का मामला उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और उनके बेटे पार्थ पवार का जल्द पीछा नहीं छोड़ने वाला है। क्योंकि हर दिन इस मामले को लेकर या तो नये खुलासे हो रहे है या फिर नये आरोप लग रहे है।
अब इस मामले को लेकर पिछले दो दिनों से सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया अजीत पवार और उनके बेटे पार्थ पवार के पीछे पड़ी है। इसी बीच बुधवार 19 नवंबर को पुणे में अंजलि दमानिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस जमीन घोटाले को लेकर अजीत पवार और पार्थ पवार पर हमला बोला।
सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्थ पवार ने संबंधित जमीन सिर्फ “कागजों पर ही नहीं खरीदी बल्कि एक महीने बाद उसका कब्जा लेने के लिए पुलिस और बाउंसर जैसे सिक्योरिटी गार्ड भी भेजे।
दमानिया ने इस घटना को “चौंकाने वाला और बेहद गंभीर” बताया। दमानिया ने मांग की कि इस मामले की जांच पूरी होने तक अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री और पुणे के पालकमंत्री पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब जमीन कब्जे में लेने की कोशिश की गई उस दिन पार्थ पवार कहा थे।
उनके मोबाईल लोकेशन से इसका पता चलेगा, और उनके कॉल डिटेल्स की जांच करने की मांग की। राजेंद्र मुठे समिति ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों की अनियमितताएं उजागर की हैं लेकिन अमेडिया एंटरप्राइजेज (पार्थ पवार से संबंधित कंपनी) के किसी भी संचालक का नाम उसमें नहीं हैं।
इस पर दमानिया ने गंभीर सवाल उठाए हैं। दमानिया ने बताया कि सिंचाई घोटाले में भी शुरू में अजीत पवार और सुनील तटकरे के नाम सामने नहीं आए थे लेकिन बाद की जांच में उनके संबंध उजागर हुए थे। जांच समिती में 5 अधिकारी पुणे से संबंधित हैं। वहीं अजीत पवार जिले पुणे पालकमंत्री है इसलिए अधिकारी सही से जांच करेंगे क्या? यह सवाल भी उन्होंने खड़ा किया है।
अमेडिया कंपनी ने मुंढवा में 40 एकड़ महार वतन जमीन खरीदा था। इस प्रक्रिया में कंपनी की ओर से भागीदार दिग्विजय पाटिल और कुलमुखत्यारचारक शीतल तेजवानी के नाम से दस्तावेज रजिस्टर्ड कराया गया था।
इसी दौरान कथित रूप से सरकारी जमीन पर स्टाम्प शुल्क माफी लेकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया था। इस मामले की गंभीरता देखते हुए रजिस्ट्रेशन उपमहानिरीक्षक राजेंद्र मुंठे की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक व मुद्रांक नियंत्रक रवींद्र बिनवडे को सीध दी। समिति ने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए है।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पुत्र और अमेडिया कंपनी के संचालक पार्थ पवार ने कोरेगाव पार्क स्थित महार वतन जमीन की खरीद के दौरान कथित रूप से स्टाम्प ड्यूटी में अवैध माफी ली थी। जिला उद्योग केंद्र से पात्रता प्रमाणपत्र संलग्न नहीं होने के बावजूद स्टाम्प शुल्क में छूट ली गई जिससे सरकार का राजस्व का नुकसान हुआ है।
त्रिस्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन गंभीर बातों का जिक्र किया है। सूत्रों के अनुसार कंपनी के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी (कुलमुखत्यारपत्र) रहते हुए भी दस्त (खरीद-बिक्री) व्यक्तिगत नाम पर रजिस्टर करते समय, ‘मुंबई सरकार का उल्लेख वाले बंद सातबारा को दस्त से जोड़ना, अभिनिर्णय (अप्रूवल) के लिए भेजे गए दस्त और अंतिम रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज में दो अलग-अलग नोट होना जैसी गंभीर त्रुटियां भी समिति ने उजागर की है।
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‘मुंबई सरकार बंद सातबारा जोड़कर दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन कराया गया दस्तावेज करीब 700+ पन्नों का है। दस्तावेज के साथ लगे सातबारा पर मुंबई सरकार’ का स्पष्ट उल्लेख है जो जमीन को सरकारी साधित करता है। सातबारा बंद होने के बावजूद उसे दस्तावेज में संलग्न किया गया।






