Parth Pawar की बढ़ी मुश्किलें, मुठे समिति ने जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी

Parth Pawar के कथित भूमि घोटाले की जांच कर रही मुठे समिति ने रिपोर्ट सौंप दी है। 1,800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में खरीदी गई थी और 21 करोड़ स्टाम्प शुल्क माफ किए जाने पर विवाद जारी है।
Parth Pawar Land Scam
पार्थ पवार जमीन घोटाला (सौ. सोशल मीडिया )
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Parth Pawar Land Scam: डिप्टी सीएम अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार के कथित भूमि घोटाले की जांच के लिए गठित मुठे समिति ने अपनी रिपोर्ट मंगलवार को पंजीयन एवं मुद्रांक महानिरीक्षक को सौंप दी।

गोपनीय होने की वजह से इस रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक इसमें लीपापोती किए जाने की खबर है। यह पूरा मामला पार्थ की कंपनी द्वारा पुणे के कोरेगांव पार्क में 40 एकड़ की जमीन खरीदी से जुड़ा है।

1,800 करोड़ रुपये की इस जमीन का सौदा मात्र 300 करोड़ रुपये में हुआ था। यहां तक कि इस सौदे के लिए 21 करोड़ रुपये के स्टाम्प शुल्क को भी माफ कर सिर्फ 500 रुपये वसूले गए थे, जिस पर पार्थ की कंपनी अमेडिया को दंड के रूप में 42 करोड़ का भुगतान करने का नोटिस दिया गया है।

विवाद बढ़ने के बाद डिप्टी सीएम अजीत पवार ने खुद इस जमीन सौदे की डील को रद्द करने की घोषणा की थी। इस वजह से अजीत पर काफी दबाव भी बढ़ गया था। ऐसी रिपोर्ट है कि सीएम आवास वर्षा पर हुई मीटिंग के दौरान वे इतने बौखला गए थे कि उन्होंने ताव में आकर महायुति गठबंधन को छोड़ने की भी धमकी दी थी।

मुठे की अध्यक्षता में जांच समिति

पार्थ के इस भूमि घोटाले की जांच के एवं लिए प्रभारी, पंजीयन महानिरीक्षक मुद्रांक नियंत्रक डॉ। सुहास दिवास ने सयुक्त पंजीयक महानिरीक्षक राजेंद्र मुठे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक महानिरीक्षक को सौंप दी है। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस धोखाधड़ी में कौन-कौन शामिल था। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस रिपोर्ट के आधार पर एक्शन पर टिकी हैं।

दंड भरने में भी रियायत, 7 दिन मोहलत

  • 40 एकड़ की जमीन के लिए पार्थ की कंपनी ने स्टाम्प शुल्क के तौर पर मात्र 500 रूपये का भुगतान किया था।
  • ऐसे में अजीत पुत्र को दंड के रूप में 42 करोड़ के भुगतान के लिए 10 दिन का नोटिस दिया गया था।
  • इसकी डेडलाइन 16 नवम्बर को खत्म (म) हो गई है। लेकिन इससे पहले 14 नवंबर को पार्थ की कंपनी ने जवाब देने के लिए 14 दिनों के एक्सटेंशन देने की मांग की थी।
  • लेकिन स्टाम्प शुल्क विभाग ने 7 दिन की मोहलत देते हुए 24 नवम्बर तक कासमय दिया है।
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