पुणे: बारामती का 320 कैमरों वाला सुरक्षा प्रोजेक्ट फाइलों में अटका, पुलिस की सुरक्षा योजना पर प्रशासनिक ब्रेक

Baramati CCTV Project: बारामती में 320 सीसीटीवी कैमरों का सुरक्षा प्रस्ताव पांच साल से मंजूरी के इंतजार में अटका। चोरी और हत्या जैसे अपराध रोकने की योजना प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी।
Pune: Baramati's 320-camera security project stuck in files, administrative brake on police security plan
Urban Surveillance Plan( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Baramati Urban Surveillance Plan: पुणे बारामती शहर और इसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए 320 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों का एक व्यापक जाल बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य चोरी, चेन स्नैचिंग, वाहन चोरी और हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाना था।

पुलिस विभाग का भी यह मानना है कि कैमरों की निगरानी से अपराधियों में भय व्याप्त होगा और शहर को एक मजबूत सुरक्षा कवच मिलेगा, लेकिन यह योजना धरातल पर उतरने से पहले ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझ गई।

पिछले पांच वर्षों से बारामती का सुरक्षा प्रस्ताव मुंबई स्थित वरिष्ठ कार्यालयों में फाइलों के बीच झूल रहा है। हर बार 'तकनीकी त्रुटियों' का बहाना बनाकर इस फाइल को वापस भेज दिया गया।

प्रशासनिक ढिलाई की पराकाष्ठा तो तब दिखी, जब इस महत्वपूर्ण योजना को बीच में ही रद्द कर दिया गया था। हालांकि, सरकारी नीतियों के अनुसार प्रस्ताव को पुनः तैयार किया गया, लेकिन बार-बार होने वाले संशोधनों ने इसकी गति रोक दी है। परिणामस्वरूप, अपराधियों पर लगाम लगाने वाला यह प्रोजेक्ट आज भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका है।

उच्च स्तरीय निर्देशों के बावजूद अनिश्चितता

हैरानी की बात यह है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने स्वयं गृह विभाग और शासन स्तर पर इस प्रोजेक्ट के लिए कई बार अनुवती कार्रवाई (की थी। राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित कई शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश भी दिए गए थे।

इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर आज भी किसी के पास इस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है। प्रशासनिक 'लाल फीताशाही' ने एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच को लाल बस्ते में डाल दिया है, जिससे जनता की सुरक्षा अधर में लटकी है।

सुरक्षा पर भारी पड़ती प्रशासनिक देरी

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस सीसीटीवी प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत निरंतर बढ़ती जा रही है, जो भविष्य में एक नई वित्तीय बाधा बन सकती है।

बारामती में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं ने स्थानीय नागरिकों में असुरक्षा की गहरी भावना पैदा कर दी है।

प्रशासनिक उपेक्षा के चलते न केवल जनता की सुरक्षा दांव पर है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ रहा है

नागरिकों की अब यह पुरजोर मांग है कि पुलिस महानिदेशक स्वयं व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करें और बढ़ते खर्च व अपराध को रोकने हेतु इस योजना को तत्काल मंजूरी देकर कार्यान्वित कराएं।

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