Scam Alert: पुणे में 1200 पुरुष बने 'लाडकी बहिन', ढाई लाख लाभार्थियों के दोबारा वेरिफिकेशन का आदेश

Ladki Bahin Yojana Scam: पुणे जिले में लाडकी बहिन योजना के तहत 1201 पुरुष लाभार्थी पाए गए हैं। अब प्रशासन ढाई लाख महिलाओं का डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन करेगा।
Ladki Bahin Yojana Scam Pune
Ladki Bahin Yojana Scam Pune प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
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Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' को लेकर पुणे जिले से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर और ई-केवाईसी (e-KYC) की खामियों का फायदा उठाकर लगभग 1201 पुरुषों द्वारा इस योजना का लाभ उठाने का मामला सामने आया है। कागज पर खुद को 'महिला' दिखाकर ये पुरुष हर महीने 1500 रुपये की सब्सिडी ले रहे थे। इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब पुणे जिले की लगभग ढाई लाख (2,25,360) महिला लाभार्थियों की पात्रता की सीधे जांच करने का फैसला लिया गया है। यह जांच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर की जाएगी ताकि वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को योजना का लाभ मिल सके।

हैरानी की बात यह है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ये पुरुष लाभार्थी सिस्टम की पकड़ में नहीं आए। सबसे ज्यादा फर्जी मामले पुणे के हवेली तालुका से सामने आए हैं। अब सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केवल तकनीकी गलती है या किसी बड़े गिरोह द्वारा जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा।

हवेली और पुणे शहर में सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पुणे जिले में कुल 2,25,360 लाभार्थियों का पुनः सत्यापन (Re-verification) किया जाएगा। इसमें सबसे अधिक संदिग्ध मामले हवेली तालुका (96,100) और पुणे शहर (23,000) से हैं। वहीं, राजगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या बेहद कम है। जांच के दौरान यदि कोई पुरुष लाभार्थी पाया जाता है, तो न केवल उसकी सब्सिडी रोकी जाएगी, बल्कि अब तक प्राप्त की गई राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता करेंगी 'डोर-टू-डोर' वेरिफिकेशन

महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल ई-केवाईसी पर भरोसा नहीं किया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रत्यक्ष रूप से लाभार्थियों के घर जाकर निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करेंगी:

लिंग सत्यापन: क्या लाभार्थी वास्तव में महिला है?

सरकारी नौकरी: क्या परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है?

आय और वाहन: क्या परिवार के पास फोर-व्हीलर है या कोई सदस्य आयकर दाता है?

पेंशन: क्या परिवार में किसी को सरकारी पेंशन मिल रही है?

यदि परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी या पेंशनर पाया जाता है, तो उस महिला लाभार्थी को तत्काल अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

पात्र महिलाएं सब्सिडी से वंचित, अपात्रों की मौज

इस जांच का एक मुख्य कारण उन पात्र महिलाओं की शिकायतें भी हैं, जिन्हें ई-केवाईसी और आवेदन के बावजूद अब तक सब्सिडी नहीं मिली है। वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ संपन्न परिवारों (जिनके पास फोर-व्हीलर या सरकारी नौकरी है) की सब्सिडी जारी रही। सरकार ने माना है कि डेटा फीडिंग और सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हुई हैं। दोबारा वेरिफिकेशन के बाद एक नई सूची तैयार की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि 1500 रुपये की आर्थिक सहायता केवल उन्हीं बहनों तक पहुँचे जो वास्तव में इसके लिए पात्र हैं।

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