
वसई-विरार महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Vasai Virar Mayor Elections: वसई विरार मनपा का तीसरा चुनाव बहुत कड़ा रहा। लेकिन, बहुजन विकास आघाड़ी को स्पष्ट बहुमत मिला। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी ने 43 सीटें जीतकर खुद को एक मजबूत विपक्ष के तौर पर स्थापित किया है।
इसलिए, 10 साल के लम्बे अंतराल के बाद, मनपा की सदन में विपक्षी पार्टी का नेता बैठेगा। वसई-विरार मनपा 2009 में बनी थी। उसके बाद, मनपा का पहला निकाय चुनाव 2010 में हुआ था। उस समय, बविआ ने 89 में से 64 सीटें जीती थीं और अपना मेयर बनाया था।
जन आंदोलन समिति, जो अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का गठबंधन था, ने चुनाव लड़ा था और 21 सीटें जीती थीं। इसलिए उन्हें विपक्ष की सीट पर बैठने का मौका मिला। उस समय, विनायक निकम 28 जून, 2010 से 28 जून, 2015 तक विपक्ष के नेता रहे। उसके बाद 2015 में दूसरा निकाय चुनाव हुआ, जिसमें बहुजन विकास आघाड़ी ने 115 में से 106 सीटें जीतीं।
लेकिन, विपक्ष डबल डिजिट तक भी नहीं पहुंच पाया, इसलिए उस समय विपक्ष का नेता कोई नहीं था। कोरोना संकट और आरक्षण के मुद्दे जैसे कई कारणों से पांच साल तक चुनाव नहीं हुए। हालांकि, इस साल मनपा चुनाव हुआ।
इसमें बविआ और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बविआ ने 115 में से 71 सीटें जीतकर अपना दबदबा साबित किया, वहीं बीजेपी, जिसके पास पहले सिर्फ एक नगरसेवक था, ने इस चुनाव में 43 का आंकड़ा पार करके एक मजबूत विपक्ष के तौर पर अपनी जगह बनाई है। इसलिए, अब करीब 10 साल बाद मनपा में कोई विपक्ष का नेता बैठेगा।
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बीजेपी-सेना गठबंधन ने 44 सीटें जीती है। इनमें बीजेपी का पलड़ा भारी है। हालांकि, सबका ध्यान इस बात पर है कि भाजपा से विपक्ष दल का नेता कौन होगा, मनोज पाटिल, प्रज्ञा पाटिल, महेश सरवणकर जैसे नाम अभी चर्चा में हैं। इसलिए, सबका ध्यान इस बात पर है कि मनपा में दूसरी बार विपक्ष दल का नेता कौन होगा।






