नासिक मनपा चुनाव 2026: चुनाव में सियासी विरासत की जंग; रण में उतरे दिग्गजों के बेटे-बहू

Family Politics: नासिक मनपा चुनाव में इस बार नई लीडरशिप चर्चा में है। पूर्व महापौरों और वरिष्ठ नेताओं के परिजन पहली बार मैदान में उतरकर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
Nashik Municipal Corporation Elections 2026: A battle for political legacy; sons and daughters-in-law of political stalwarts enter the fray
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोेर्स: सोशल मीडिया AI )
Published on
Updated on

Nashik Municipal Election Political Legacy: नासिक महानगरपालिका चुनाव का पारा अब चरम पर है। इस बार का चुनाव न केवल पुरानी राजनीतिक लड़ाई के लिए, बल्कि 'नई लीडरशिप' के उदय के लिए भी याद किया जाएगा। शहर के प्रमुख राजनीतिक परिवारों से करीब दो दर्जन नए उम्मीदवार पहली बार चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

इनमें पूर्व महापौरों, विधायकों और वरिष्ठ पार्षदों के बेटे, बेटियां, पत्नियां, बहू और पोते तक शामिल हैं। इस चुनाव में शहर के कई बड़े राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पूर्व महापौर विनायक पांडे की बहू अदिति और उनके भाई की बेटी शिवानी मैदान में हैं।

वहीं पूर्व महापौर सतीश कुलकर्णी की बेटी संध्या भी पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रही हैं। पूर्व महापौर दशरथ पाटिल के बेटे प्रेम पाटिल और उनके भतीजे अमोल पाटिल के बीच होने वाला मुकाबला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह परिवार की अगली पीढ़ी का सीधा संघर्ष है। पूर्व महापौर यतिन वाघ की पत्नी हितेश वाघ और पूर्व उपमहापौर भिकूबाई बागुल के पोते मनीष बागुल अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए वोट मांग रहे हैं।

प्रमुख दलों से चुनावी 'श्री गणेश' करने वाले नाम

नासिक की नई लीडरशिप में इन नामों पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सावजी की बेटी नूपुर, पूर्व पार्षद विजय साने के बेटे अजिंक्य, और पूर्व पार्षद गणेश गीते की पत्नी दीपाली भाजपा के टिकट पर अपनी पारी शुरू कर रहे है। पूर्व पार्षद सुधाकर बडगुजर के बेटे दीपक, पूर्व विधायक नितिन भोसले की भाभी रश्मि और पूर्व पार्षद गजानन शेलार के भतीजे बबलू भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। शहर अध्यक्ष रंजन ठाकरे की पत्नी सीमा और स्टेट जनरल सेक्रेटरी दिलीप खैरे के भाई अंबादास इस बार जनता की अदालत में हैं।

शिक्षा घर से, परीक्षा जनता की अदालत में

हालांकि इन सभी उम्मीदवारों को राजनीति की व्यावहारिक शिक्षा अपने माता-पिता, चाचा या दादा-दादी से विरासत में मिली है, लेकिन उनके लिए असली परीक्षा 15 जनवरी को होने वाले मतदान में होगी।

नासिक के जागरूक मतदाता इस 'राज परिवार' वाली नई लीडरशिप को स्वीकार करते हैं या किसी स्वतंत्र युवा नेतृत्व को मौका देते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। प्रचार के दौरान ये नए उम्मीदवार अपने बड़ों के विकास कार्यों का हवाला दे रहे हैं, - लेकिन उनकी खुद की विजन और - कार्यशैली ही उनकी हार-जीत का मुख्य आधार बनेगी। शहर के लोग अब इस बात - पर नजरें जमाए हुए हैं कि इनमें से कितने चेहरे भविष्य में नासिक की राजनीति की मुख्यधारा का हिस्सा बनेंगे।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com