
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोेर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election: नासिक महानगरपालिका चुनाव में इस बार एक ऐसी लड़ाई देखने को मिल रही है, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक ही समय में महापौर और उपमहापौर के पद पर रहकर शहर की कमान संभालने वाले दो पूर्व दिग्गज नेता इस साल एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
मनसे के स्वर्ण काल और पिछले सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान नासिक की सत्ता में साथ रहे इन नेताओं की वर्तमान स्थिति इस प्रकार हैः अशोक मुर्तडक (पूर्व महापौर): मुर्तडक ने मनसे छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और टिकट की उम्मीद की थी।
हालांकि, भाजपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय नामांकन भरा। अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने उन्हें अपना समर्थन देकर अपना ‘प्रायोजित’ उम्मीदवार बनाया है। गुरमीत बग्गा (पूर्व उपमहापौर): हाल ही में भाजपा में शामिल हुए बग्गा को पार्टी ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है।
जो बग्गा कभी मुर्तडक के सहायक के रूप में उपमहापौर थे, अब वे उन्हें ही कड़ी चुनौती दे रहे हैं। भाजपा-शिंदे सेना में सीधी भिड़ंत नाशिक में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच यह मुकाबला काफी प्रतिष्ठित बन गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पहले ही शहर में मोर्चा खोल रखा है।
दूसरी ओर, मंत्री दादा भुसे भी शिंदे सेना के उम्मीदवारों के लिए मैदान में उत्तर चुके हैं। उन्होंने गंगापुर इलाके में बड़ी जनसभा कर भाजपा को कड़ी चुनौती दी है। वे वार्ड 8 में विलास शिंदे के लिए भी पसीना बहा रहे है।
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नासिक की इस चुनावी जंग में पूर्व सांसद हेमंत गोडसे, विधायक किशोर दराडे और नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगर जैसे बड़े चेहरे भी अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। बड़ी संख्या में पूर्व पार्षदों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। अब देखना यह होगा कि नासिक की जनता अपने पुराने ‘प्रशासकों’ में से किसे चुनती है और क्या मुर्तडक और बग्गा की – यह निजी लड़ाई किसी नए चेहरे के लिए रास्ता साफ करती है।






