नासिक मनपा चुनाव: दिग्गजों का दबदबा, 735 उम्मीदवार मैदान में; नए चेहरों की अग्निपरीक्षा

Civic Body Election: नासिक मनपा चुनाव में 735 उम्मीदवारों के साथ सियासी तस्वीर साफ हो चुकी है। दलों ने जमीनी कार्यकर्ताओं से ज्यादा दिग्गजों और उनके परिवारों पर भरोसा जताया है।
Nashik Municipal Corporation Elections: Dominance of political heavyweights, 735 candidates in the fray; a test for new faces
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोेर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Municipal Election: नासिक महानगरपालिका चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। मैदान में डटे 735 उम्मीदवारों ने शहर की राजनीतिक तपिश बढ़ा दी है। इस बार के चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजनीतिक दलों ने जमीन पर काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं की तुलना में पुराने दिग्गजों और उनके परिवार वालों पर अधिक भरोसा जताया है। सत्ता की यह लड़ाई अब अनुभव बनाम नए चेहरों और पार्टी लॉयल्टी बनाम बगावत के बीच सिमट गई है।

साख का असली टेस्ट

यह चुनाव केवल पार्षदों के चयन का नहीं, बल्कि स्थापित नेतृत्व की साख का भी परीक्षण है। दिग्गजों का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्य उन्हें जीत दिलाएंगे, जबकि नए चेहरे और नाराज कार्यकर्ता 'परिवर्तन' की बात कर रहे हैं। 729 उम्मीदवारों की भीड़ में वोटरों का मन टटोलना फिलहाल किसी चुनौती से कम नहीं है।

मैदान में पूर्व महापौरों का दबदबा

इस चुनाव में तीन पूर्व महापौर खुद मैदान में हैं, जबकि तीन अन्य ने अपने परिवार के सदस्यों को उतारा है। भाजपा के टिकट पर पूर्व महापौर रंजना भानसी और नयना घोलप चुनाव लड़ रही है। वहीं, मनसे छोड़कर भाजपा में आए अशोक मुर्तडक को जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया, तो शिंदे सेना ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है।

उद्धव सेना से भाजपा में शामिल हुए विनायक पांडे की बहू और पूर्व महापौर अदिति पांडे चुनावी मैदान में हैं। इसी तरह, पूर्व महापौर यतिन वाघ की पत्नी हितेश वाघ और पूर्व महापौर सतीश कुलकर्णी की बेटी संध्या कुलकर्णी भी भाजपा के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रही हैं।

नगरपालिका प्रशासन और सत्ता पर पकड़ रखने वाले कई पुराने चेहरे एक बार फिर वोटरों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के पूर्व चेयरमैन सुरेश पाटिल, संजय चव्हाण, हिमगौरी आडके, रमेश घोंगड़े, शाहू खैरे और शिवाजी गांगुर्डे जैसे प्रभावशाली नेता इस बार फिर पार्षद बनने की रेस में हैं।

सदन के पूर्व नेता दिनकर पाटिल और चंद्रकांत खोड़े के साथ-साथ विपक्ष के पूर्व नेता सुधाकर बडगुजर, डॉ. हेमलता पाटिल और अजय बोरस्ते भी अपनी साख बचाने के लिए कड़े मुकाबले में उतरे हैं।

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