
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election: नासिक चुनावी रणभूमि में जब प्रतिद्वंद्वी अपना ही सगा हो, तो लड़ाई और भी दिलचस्प और कड़वी हो जाती है। हाल ही में संपन्न हुए महापालिका चुनाव में नासिक के मतदाताओं ने दो ऐसी लड़ाइयां देखीं जहां खून के रिश्ते राजनीतिक वर्चस्व के लिए आमने-सामने थे। इन मुकाबलों में स्पष्ट संदेश मिला कि सत्ता की कुर्सी के आगे पारिवारिक भावनाएं अक्सर गौण हो जाती हैं।
प्रभाग 9: पाटिल विरासत की जंग और दो भाइयों का टकराव सातपुर के प्रभाग क्रमांक 9 में दो चचेरे भाइयों के बीच हुई भिड़ंत शहर भर में चर्चा का विषय रही। दिनकर पाटिल के पुत्र अमोल पाटिल और दशरथ पाटिल के पुत्र प्रेम पाटिल के बीच सीधी टक्कर हुई।
नामांकन से महज दो दिन पहले दिनकर पाटिल सपरिवार भाजपा में शामिल हुए थे, जबकि अगले ही दिन पूर्व महापौर दशरथ पाटिल और प्रेम पाटिल ने शिवसेना (शिंदे गुट) का दामन थाम लिया था, मतदाताओं के लिए यह मुकाबला नया नहीं था, क्योंकि दोनों भाई अपने-अपने पिता की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को ही आगे बढ़ा रहे थे।
रिश्तों की दूसरी बड़ी जंग प्रभाग क्रमांक 24 में देखने को मिली, यहां मुकाबला’ भाभी और देवर’ के बीच था। कल्पना शिवाजी चुंबले और उनके देवर कैलास चुंबले जीत के लिए आमने-सामने थे। मतदाताओं ने इस पारिवारिक लड़ाई में कल्पना चुंबले (भाभी) पर भरोसा जताया और कैलास चुंबले (देवर) को हार का स्वाद चखना पड़ा।
इन दोनों ही प्रभागों में चुनावी प्रचार के दौरान मर्यादाओं और पारिवारिक संबंधों की अग्निपरीक्षा थी। मतदाताओं ने भी उम्मीदवारों के पार्टी चिन्ह से ज्यादा उनके व्यक्तिगत स्सूख और पारिवारिक पृष्ठभूमि को तवज्जो दी।
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जहां प्रभाग 9 में पाटिल परिवार की दो शाखाएं आपस में टकराई, वहीं प्रभाग 24 में चुंबले परिवार का आंतरिक कलह सड़क पर आ गया, अंततः जीत उसी की हुई जिसने जनता के बीच अपनी पैठ अधिक मजबूत रखी थी।






