
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election: नासिक जैसे-जैसे महानगरपालिका चुनाव का प्रचार अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच रहा है, वैसे-वैसे अपराध का साया शहर के राजनीतिक माहौल को धुंधला कर रहा है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों और चुनाव प्रचार तंत्र में दागियों की बढ़ती हिस्सेदारी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में फिलहाल सत्ताधारी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि लगभग हर दल ने दागी चेहरों को गले लगाया है।
शहर के कई वार्डों में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले चेहरे न केवल चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि प्रचार मशीनरी को भी नियंत्रित कर रहे हैं। चुनाव प्रचार में ऐसे कई चेहरे सक्रिय हैं जो या तो गंभीर मामलों में बेल पर बाहर हैं या जिन्हें कोर्ट से सजा मिल चुकी है।
ये दागी चेहरे केवल भीड़ बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पार्टी की जीत का गणित तय करने वाले अहम पदों पर बैठे हैं। मतदाताओं से सीधे संपर्क और सभाओं के दौरान इन चेहरों की मौजूदगी से आम नागरिकों में कानून-व्यवस्था को लेकर डर का माहौल है।
प्रचार के दौरान सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियां एक-दूसरे पर आपराधिक बैकग्राउंड वाले लोगों को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही हैं। हालांकि, जब स्वयं की उम्मीदवार लिस्ट की बात आती है, तो कोई भी दल ‘साफ-सुथरा’ नजर नहीं आता। जिन नेताओं ने पहले अपराधियों को पार्टी में शामिल करने का विरोध किया था, वे अब अपनी ही पार्टी के दागी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट मांगते हुए मौन साधे हुए हैं।
लोकतंत्र की रीढ़ माने जाने वाले चुनावी प्रोसेस में बढ़ता अपराध का दखल एक गंभीर चेतावनी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाताओं ने वोट देने से पहले उम्मीदवारों का बैकग्राउंड चेक नहीं किया, तो भविष्य में राजनीति और अपराध का यह गठजोड़ शहर की नई पहचान बन जाएगा। यह चुनाव केवल प्रतिनिधियों को चुनने का नहीं, बल्कि राजनीति को साफ-सुथरा करने का भी अवसर है।
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