
Forest Rights Act (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Farmers Protest: वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, पश्चिम की ओर बहने वाले पानी को राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की ओर मोड़ने और पेसा के तहत भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा निकाला गया लॉन्ग मार्च गुरुवार को समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री गिरीश महाजन की मध्यस्थता में शासन स्तर पर हुई सकारात्मक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया।
हजारों किसानों का यह मार्च बुधवार, 28 जनवरी को मुंबई की सीमा पर स्थित भातसा नगर फाटा तक पहुंच गया था। यदि यह मोर्चा मुंबई में प्रवेश करता, तो शहर का जनजीवन प्रभावित होने की आशंका थी। हालांकि, गुरुवार 29 जनवरी को नाशिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, ठाणे के पुलिस अधीक्षक डी. एस. स्वामी और शासन के प्रतिनिधि भातसा फाटा पहुंचे और किसानों को सरकार की भूमिका तथा बैठक के मिनट्स (इतिवृत्त) सौंपे।

बैठक की कार्यवाही शुरू होने से पहले दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद पूर्व विधायक जीवा पांडू गावित और किसान नेता कॉम्रेड अशोक ढवले ने प्रदर्शनकारियों को सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री गिरीश महाजन के कार्यालय की ओर से प्रदर्शनकारियों को उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई।
वन अधिकार: वन भूमि पर दावा करने वाले सभी किसानों के दावों की पुनः जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए मंत्रियों की एक विशेष क्रियान्वयन समिति गठित की गई है।
सरकारी लाभ: वन भूमि धारकों को फसल निरीक्षण (पीक पाहणी) के आधार पर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।
भर्ती और मानदेय: पेसा के अंतर्गत 50 प्रतिशत रिक्त पदों को तत्काल भरने, दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा स्कूली पोषण आहार कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि का आश्वासन दिया गया।
शिक्षा: दुर्गम क्षेत्रों के छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और स्कूल भवनों की मरम्मत सुनिश्चित की जाएगी।
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इससे पहले 27 जनवरी को मंत्रालय में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और दादासाहेब भुसे सहित विभिन्न विभागों के मंत्रियों एवं सचिवों के साथ किसान शिष्टमंडल की लगभग दो घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। शिष्टमंडल में डॉ. अजीत नवल, विधायक विनोद निकोले, इंद्रजीत गावित सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।






