Economic Survey 2026: थाली से लेकर जेब तक राहत! सर्वे में महंगाई पर खुलासा, गिर गए इन जरूरी चीजों के भाव

Economic Survey: आर्थिक सर्वे में महंगाई पर सरकार की कोशिशों का भी असर दिखा है। सर्वे में सरकार ने बताया है कि CPI सीरीज के साथ ही भारत में महंगाई निचले स्तर पर गई।
food inflation data in economic survey
(कॉन्सेप्ट फोटो)
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Economic Survey 2026: 1 फरवरी को केंद्रीय बजट- 2026 आने से पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद के बजट सत्र में देश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। इस दस्तावेज के साथ ही सरकार ने बताया है कि साल 2025 पर भारत का प्रदर्शन आर्थिक विकास के मोर्चे पर कहां रहा और साल 2026 में इसके कैसे रहने के अनुमान हैं। FY26 के लिए रियल GDP ग्रोथ पर पहला एडवांस एस्टीमेट 7.4% और 7.3% दिया गया है। वहीं, वित्त वर्ष- 27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.8-7.2% पर रहने का अनुमान है। अच्छी खबर रिटेल और फूड इंफ्लेशन पर आई है।

इस सर्वे में महंगाई पर सरकार की कोशिशों का भी असर दिखा है। सर्वे में सरकार ने बताया है कि CPI सीरीज के साथ ही भारत में महंगाई निचले स्तर पर गई। अप्रैल-दिसंबर-25 में महंगाई 1.7% की तक गिर गया था।

खुदरा महंगाई में गिरावट की वजह

रिटेल इंफ्लेशन में यह बड़ी राहत मुख्य तौर पर खाने-पीने और ईंधन की कीमतों में आई नरमी से आई है। फूड और फ्यूल मिलकर भारत के CPI बास्केट का करीब 52.7 फीसदी हिस्सा बनाते हैं, इसलिए इनमें गिरावट का सीधा असर कुल महंगाई पर पड़ा। खास बात यह है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने सबसे तेज महंगाई गिरावट दर्ज की है। 2024 के मुकाबले 2025 में भारत की हेडलाइन इंफ्लेशन करीब 1.8 प्रतिशत अंक घटी है। यानी बाकी देशों की तुलना में भारत में कीमतों पर दबाव तेजी से कम हुआ है, जो इकॉनमी के लिए पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है।

खाद्य महंगाई में भी बड़ी गिरावट

सबसे अच्छी बात रही कि इस अवधि में खाद्य महंगाई में भी जोरदार गिरावट रही। पूरे साल इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। जून 2025 के बाद से फूड इंफ्लेशन डिफ्लेशन जोन में चला गया, यानी खाने-पीने की चीजें महंगी होने की बजाय सस्ती होने लगीं। अक्टूबर 2025 में CPI सीरीज की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज हुई, जब फूड महंगाई में करीब 5.02 फीसदी की कमी आई।

सब्जियों के कीमतों में कमी का असर

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सब्जियों के दामों में तेज और लगातार कमी रही। पूरे साल सब्जियों की कीमतें नेगेटिव जोन में बनी रहीं। इसके साथ ही दालों की महंगाई भी करीब नौ महीनों तक लगातार घटती रही। मसालों की कीमतें भी करीब 18 महीनों तक डिफ्लेशन में रहीं, हालांकि, इनमें गिरावट ज्यादा तेज नहीं थी।

अनाज की महंगाई से भी बड़ी राहत

अनाज यानी सीरियल्स की महंगाई भी सालभर कम होती चली गई। जनवरी 2025 में जहां अनाज महंगाई 6.2 फीसदी थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर माइनस 0.4 फीसदी पर आ गई। सब्जी, दाल, मसाले और अनाज जैसे अहम फूड आइटम्स में आई इस नरमी ने मिलकर देश में कुल महंगाई को रिकॉर्ड निचले स्तर पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई।

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