खतरे में जलापूर्ति और ग्रामीण अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवा, 12.96 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया

Public Utilities Crisis: नागपुर जिले में 12.96 करोड़ रुपये के बिजली बिल बकाया के कारण जलापूर्ति योजनाओं और ग्रामीण अस्पतालों की बिजली कटने का खतरा मंडरा रहा है।
public utilities crisis
Public Utilities Crisis:नागपुर जिला (सोेर्सः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Nagpur News: जिले के कामठी और कन्हान सहित कई क्षेत्रों की जलापूर्ति योजनाएं और ग्रामीण अस्पताल महावितरण के रडार पर आ गए हैं। बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संबंधित संस्थाओं ने बीते 2-3 वर्षों से बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया है। इस स्थिति में महावितरण ने संबंधित विभागों को बिजली कनेक्शन काटने का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है और किसी भी समय कार्रवाई की जा सकती है।

यदि बिजली आपूर्ति बंद की जाती है, तो हजारों परिवारों को पीने के पानी से वंचित होना पड़ सकता है और ग्रामीण अस्पतालों में अंधेरा छा सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। सूत्रों के अनुसार, कामठी, कन्हान सहित अन्य क्षेत्रों की जलापूर्ति योजनाओं और अस्पतालों पर कुल 12.96 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।

महावितरण कभी भी काट सकती है कनेक्शन

वसूली नहीं हो पाने के कारण महावितरण के संबंधित जोन के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी वजह से अब कंपनी कड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

2023 से नहीं जमा हुआ एक भी रुपया

सूत्रों ने बताया कि कामठी नगर परिषद की जलापूर्ति योजना पर सितंबर 2025 से 3.61 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। वहीं कन्हान नगर परिषद ने अप्रैल 2023 से एक भी रुपया जमा नहीं किया, जिसके चलते उस पर 6.87 करोड़ रुपये का बकाया हो गया है। महावितरण ने 4 जनवरी को दोनों नगर परिषदों को बिजली आपूर्ति खंडित करने का नोटिस जारी कर दिया है। यदि कार्रवाई होती है, तो हजारों परिवारों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

जलापूर्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी खतरे में हैं।

  • उपजिला अस्पताल, कामठी: 23.17 लाख रुपये बकाया
  • ग्रामीण अस्पताल, रामटेक: 13.58 लाख रुपये बकाया
  • डिगडोह देवी (हिंगना) ग्राम पंचायत: 97.13 लाख रुपये बकाया
  • उमरेड नगर परिषद और जीवन प्राधिकरण: लगभग 25 लाख रुपये बकाया

महावितरण के वरिष्ठ अधिकारी 100 प्रतिशत बिजली बिल वसूली पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में कंपनी के संचालक ने समीक्षा बैठक लेकर बिल वसूली में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

जीवनरक्षक सेवाओं जैसे जलापूर्ति और अस्पतालों पर बकाया होने के बावजूद अब तक महावितरण संयम बरतती रही, लेकिन संबंधित संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब उनकी उदासीनता का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com